तहलका टुडे टीम/सदाचारी लाला उमेश चंद्र श्रीवास्तव/मोहम्मद वसीक
बाराबंकी देवा ब्लॉक के ग्राम खेवली में हाल ही में जिस महादेव कोल्ड स्टोरेज का उद्घाटन हुआ, वह सिर्फ़ आलू-प्याज़ को ठंडा रखने का इंतज़ाम नहीं है, बल्कि राजनीति को हर मौसम में सुरक्षित रखने की एक आधुनिक व्यवस्था भी है।
ख़ास बात यह कि यह कोल्ड स्टोरेज किसी समर्थक या उद्योगपति का नहीं, बल्कि समाजवादी पार्टी के नगर विधायक सुरेश यादव का ही है।
टेंट से टाइटल तक का सफ़र
सुरेश यादव का राजनीतिक-व्यावसायिक सफ़र किसी प्रेरक कहानी से कम नहीं—बस फर्क इतना है कि यहाँ प्रेरणा जनता को कम और सिस्टम को ज़्यादा मिलती है।
कभी टेंट व्यवसाय से पहचान बनाने वाले सुरेश यादव आज प्रॉपर्टी डीलिंग के ऐसे विशाल नेटवर्क के सरपरस्त हैं कि ज़मीन कम और सौदे ज़्यादा दिखाई देते हैं। विधायक बनने के बाद पत्नी का ब्लॉक प्रमुख बन जाना इस बात का सबूत है कि लोकतंत्र में परिवारिक समझ कितनी ज़रूरी हो गई है।
बीजेपी राज में समाजवादी ठंडक
दिलचस्प यह है कि बीजेपी सरकार के दौर में कोल्ड स्टोरेज जैसे पूंजी-प्रधान कारोबार का खड़ा होना अपने आप में एक राजनीतिक कौशल है।
कहा जाता है कि इस प्रतिष्ठान में मुसलमान मज़दूरों से लेबराई और मुंशीगीरी करवाने की नियत से कायम की गई है—यानी रोज़गार भी मिला और सामाजिक सद्भाव का ठेका भी।
राजनीति में इसे ही शायद ऑल वेदर मैनेजमेंट कहते हैं।
नेताओं की हाज़िरी, संकेत साफ़
उद्घाटन समारोह में समाजवादी कुनबे की पूरी ठंडक मौजूद थी।
पूर्व मंत्री, पूर्व विधायक और वर्तमान राष्ट्रीय सचिव अरविंद सिंह गोप की मौजूदगी ने कार्यक्रम को राजनीतिक वैधता दी,
तो वहीं राकेश वर्मा की शिरकत ने यह साफ़ कर दिया कि मामला सिर्फ़ कारोबार का नहीं, संगठनात्मक एकजुटता का भी है।
यह वही समाजवादी पार्टी है—समाजवादी पार्टी—जिसके शीर्ष पर अखिलेश यादव हैं और ज़मीन पर नेता अपने-अपने कोल्ड स्टोरेज मॉडल से राजनीति को सुरक्षित रखने में लगे हैं।
महादेव के नाम पर सब कुछ जायज़?
नाम महादेव है, इसलिए सवाल उठाना भी थोड़ा जोखिम भरा हो जाता है।
यहाँ सवाल यह नहीं कि कोल्ड स्टोरेज क्यों बना, सवाल यह है कि
क्या सत्ता, संपत्ति और संगठन—तीनों का तापमान एक ही हाथ से नियंत्रित होना चाहिए?
कोल्ड स्टोरेज में फसलें सुरक्षित हैं,
नेताओं के भविष्य सुरक्षित हैं,
बस अगर कुछ असुरक्षित है तो वह है—जनता की याददाश्त।
खेवली का यह उद्घाटन बताता है कि आज की राजनीति में
टेंट भी ज़रूरी है,
ट्रस्ट भी,
और सबसे ज़्यादा ज़रूरी है—
अपना निजी कोल्ड स्टोरेज।
बाक़ी,
महादेव हैं…
सब देख रहे हैं।
0 Comments