बाराबंकी, 4 नवम्बर 2025।
जनहित और पर्यावरण सुरक्षा से जुड़ा एक ऐतिहासिक कदम बाराबंकी की अदालत ने उठाया है। मनीष मेहरोत्रा बनाम रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड आदि मामले में, प्रार्थी पक्ष के अधिवक्ता श्री रणधीर सिंह सुमन की जोरदार व प्रभावशाली बहस के बाद, अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, न्यायालय संख्या-11, बाराबंकी (श्री सक्षम द्विवेदी) ने आदेश जारी किया कि थानाध्यक्ष जहांगीराबाद मामले में एक सप्ताह के भीतर प्रारंभिक जांच कर विस्तृत रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत करें।
यह मामला Criminal Misc. Case No. 62660/2025 (CNR No. UPBB040626722025) के रूप में दर्ज है और धारा 173(4) भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के अंतर्गत दायर हुआ था।
⚖️ रणधीर सिंह सुमन की कानूनी दलीलें बनीं निर्णायक
अधिवक्ता रणधीर सिंह सुमन ने अदालत के समक्ष विस्तृत और साक्ष्यपूर्ण बहस रखते हुए कहा कि —
“रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड, देवां रोड, बाराबंकी में बायोगैस निर्माण के नाम पर खतरनाक रासायनिक और प्लास्टिक मिश्रित कचरा तैयार कर रही है। इस कचरे को खुले में फेंका जा रहा है, जिससे हवा, पानी, मिट्टी और जनस्वास्थ्य पर घातक प्रभाव पड़ रहा है।”
उन्होंने कहा कि किसानों को यह कहकर गुमराह किया जा रहा है कि यह अपशिष्ट खेतों के लिए खाद है, जबकि वास्तव में यह रसायनों से भरा विषैला अपशिष्ट (Toxic Waste) है, जो मिट्टी की उर्वरकता को नष्ट कर रहा है और पानी के स्रोतों को प्रदूषित कर रहा है।
सुमन ने अदालत को यह भी अवगत कराया कि कंपनी के भारी डंपरों ने देवां रोड और श्रीराम वन कुटरी आश्रम मार्ग को क्षतिग्रस्त कर दिया है। इनसे उत्पन्न जाम और दुर्घटनाओं ने स्थानीय जनता का जीवन कठिन बना दिया है।
उन्होंने यह भी कहा कि इस जहरीले कचरे की चपेट में सैकड़ों मवेशियों की मौत हो चुकी है।
📜 प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल उठे
अधिवक्ता रणधीर सिंह सुमन ने यह भी बताया कि प्रार्थी ने दिनांक 03.10.2025 को इस पूरे प्रकरण की लिखित शिकायत पुलिस अधीक्षक बाराबंकी को रजिस्टर्ड डाक द्वारा भेजी थी, लेकिन अब तक कोई एफआईआर या जांच नहीं हुई।
उन्होंने अदालत के समक्ष यह तर्क दिया कि —
“जब शासन-प्रशासन निष्क्रिय हो जाए, तो न्यायालय की नैतिक और संवैधानिक जिम्मेदारी है कि जनहित में कार्रवाई सुनिश्चित करे।”
सुमन ने यह भी कहा कि “सत्ता से जुड़े बड़े औद्योगिक घरानों की ताकत के आगे पर्यावरण और गरीब किसानों की आवाज दबाई नहीं जानी चाहिए।”
🧑⚖️ अदालत का आदेश — सुप्रीम कोर्ट की ‘ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार’ गाइडलाइन लागू
न्यायालय ने पत्रावली का अवलोकन करने के बाद पाया कि थाना जहांगीराबाद में इस संबंध में अभी तक कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है।
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सक्षम द्विवेदी ने कहा कि आरोप गंभीर हैं और इनसे पर्यावरण, पशुजीवन और जनस्वास्थ्य पर घातक प्रभाव पड़ सकता है।
अतः उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के “ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार” (12 नवम्बर 2013) के निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि इस स्थिति में प्रारंभिक जांच न्यायोचित है।
न्यायालय ने आदेश दिया कि —
“थानाध्यक्ष जहांगीराबाद, बाराबंकी को निर्देशित किया जाता है कि प्रार्थनापत्र अंतर्गत धारा 173(4) बी.एन.एस.एस. में लगाए गए आरोपों की प्रारंभिक जांच कर विस्तृत रिपोर्ट एक सप्ताह के भीतर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करें। पत्रावली 15 नवम्बर 2025 को न्यायालय में पेश की जाए।”
🌍 पर्यावरण संरक्षण और न्याय की दिशा में ऐतिहासिक फैसला
यह आदेश न केवल एक औद्योगिक प्रतिष्ठान पर कानूनी कार्रवाई की शुरुआत है, बल्कि यह एक जनहित के मुद्दे को न्यायिक मान्यता देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो यह मामला Environment Protection Act 1986, Water Pollution Act 1974, Public Nuisance तथा Prevention of Cruelty to Animals Act 1960 के गंभीर उल्लंघन की श्रेणी में आएगा।
पर्यावरण कार्यकर्ता इस निर्णय को “जनहित की जीत” बता रहे हैं।
🔍 अब नज़र 15 नवम्बर पर — क्या खुलेंगे रिलायंस के ‘कचरे’ के राज़?
न्यायालय का यह आदेश अब पूरे बाराबंकी जनपद का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है।
अदालत द्वारा दिए गए एक सप्ताह के निर्देश के तहत जब थानाध्यक्ष जहांगीराबाद की रिपोर्ट आएगी, तब यह तय होगा कि क्या वाकई रिलायंस इंडस्ट्रीज ने पर्यावरण और जनजीवन के साथ खिलवाड़ किया है या नहीं।
जनता अब बेसब्री से 15 नवम्बर 2025 की अगली तिथि की प्रतीक्षा कर रही है।
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