तहलका टुडे टीम/सदाचारी लाला उमेश चंद्र श्रीवास्तव/मोहम्मद वसीक
बाराबंकी। महात्मा गांधी को गोलियों से मारा जा सकता है, उनके विचारों को नहीं। गांधी हर रोज मारे जाते हैं, लेकिन हर रोज जिंदा भी होते हैं — जब कोई बिना नफ़रत किए विरोध करता है, जब कोई सत्य और इंसानियत के साथ खड़ा होता है। यही गांधी की अमरता है।
गांधी भवन में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के 78वें बलिदान दिवस पर आयोजित महात्मा गांधी स्मृति व्याख्यान में देश के सुप्रसिद्ध पत्रकार एवं गांधीवादी अध्येता राहुल देव ने कहा—“गांधी की हत्या उनके शरीर से हुई थी, उनके विचारों से नहीं। आज हम यहां उन्हें याद कर रहे हैं, यही इस बात का प्रमाण है कि गांधी मरे नहीं हैं। जब तक हम सविनय विरोध करना जानते हैं, तब तक गांधी जिंदा रहेंगे।”
राहुल देव ने चिंता जताते हुए कहा कि हम एक ऐसे जहरीले दौर से गुजर रहे हैं, जहां यह सोचकर डर लगता है कि हमारी आने वाली पीढ़ियां किस माहौल में सांस लेंगी।
उन्होंने कहा—
उन्होंने युवाओं से गांधी को पढ़ने, समझने और जीने का आह्वान करते हुए कहा कि“अगर हम गांधी को अपनी युवा पीढ़ी तक नहीं पहुंचा पाए, तो गांधी की जय बोलने से कोई लाभ नहीं। गांधी को याद करना आज हिम्मत का काम है, जबकि उन्हें गाली देने वालों को हिम्मत नहीं चाहिए।”
“पिछले दो सौ वर्षों में गांधी से बड़ा हिन्दू और उनसे बड़ा इंसान कोई नहीं हुआ।”
कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः 11 बजे दो मिनट के मौन के साथ हुई। इसके बाद बालाजी का बचपन स्कूल के बच्चों ने
‘रघुपति राघव राजा राम’ और ‘वैष्णव जन तो तेने कहिए’ जैसे गांधी भजनों का सस्वर गायन कर पूरे वातावरण को भावुक बना दिया।
सभा को संबोधित करते हुए वरिष्ठ पत्रकार शीतल पी. सिंह ने कहा—
“हिन्दू–मुस्लिम एकता गांधीजी के जीवन का मूलमंत्र था। दुर्भाग्यपूर्ण है कि समकालीन राजनीति ने गांधी के इस मिशन को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाया।”
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि गांधी के सीने को गोलियों से छलनी करने वाला व्यक्ति हिन्दू राष्ट्रवाद (हिन्दुत्व) की कट्टर विचारधारा से जुड़ा था, जो राष्ट्रीय आंदोलन की विचारधारा के बिल्कुल विपरीत थी।
पूर्व कैबिनेट मंत्री अरविन्द कुमार सिंह गोप ने कहा—
“दुनिया की सबसे बड़ी ताकत से एक निहत्था आदमी लड़ा और उसी ने साम्राज्य को भारत छोड़ने पर मजबूर कर दिया। यही गांधी थे, जिन्हें पूरी दुनिया महात्मा गांधी के नाम से जानती है।”
कार्यक्रम संयोजक राजनाथ शर्मा ने कहा कि गांधी का रास्ता सत्य, अहिंसा और संवाद का रास्ता है और आज की दुनिया को हथियारों से ज़्यादा इन्हीं मूल्यों की ज़रूरत है।
सभा की अध्यक्षता ईदगाह कमेटी के अध्यक्ष एवं समाजसेवी मो. उमेर किदवई ने की, जबकि संचालन पाटेश्वरी प्रसाद ने किया।
सभा को वरिष्ठ पत्रकार अनिल त्रिपाठी, दीपक मिश्र, वरिष्ठ अधिवक्ता शऊर कामिल किदवई, वरिष्ठ सपा नेता हुमायूं नईम खान, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता शिवशंकर शुक्ला ने भी संबोधित किया।
सभा में प्रमुख रूप से
शिक्षाविद् अशोक शुक्ला, वरिष्ठ सपा नेता प्रमोद वाजपेयी, पूर्व प्रधान ज्ञान सिंह यादव, सलाउद्दीन किदवई, मृत्युंजय शर्मा, समाजसेवी सिद्धार्थ अवस्थी, विनय कुमार सिंह, विजय पाल गौतम, अहमद सईद किदवई, आकाश त्रिपाठी, दानिश आज़म वारसी, तौकीर कर्रार, हशमत अली गुड्डू, साकेत संत मौर्य, निशात अहमद, रंजय शर्मा, नीरज दूबे, सत्यवान वर्मा, राम मनोरथ वर्मा, शिवनारायण गौतम सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
शाम को आलापुर स्थित रेठ नदी के तट पर दीपदान कर महात्मा गांधी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। जल में प्रवाहित होते दीप मानो यह संदेश दे रहे थे—
गांधी मरे नहीं हैं,
वे हमारी ज़िम्मेदारी बनकर आज भी जीवित हैं।
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