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“लौहपुरुष की विरासत और महिला नेतृत्व: अमित शाह से प्रियंका सिंह रावत की मुलाकात ,देवा महादेवा की धरती अयोध्या द्वार बाराबंकी का बढ़ा मान”

तहलका टुडे टीम/सदाचारी लाला उमेश चंद्र श्रीवास्तव/मोहम्मद वसीक

लखनऊ।केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के लखनऊ आगमन पर राजनीति का एक ऐसा सौम्य और आत्मीय दृश्य देखने को मिला, जिसने सत्ता के शोर से अलग संवेदना और संस्कार की राजनीति की झलक पेश की।
इस मौके पर बाराबंकी की आन-बान-शान, पूर्व सांसद प्रियंका सिंह रावत ने जिस गरिमामय अंदाज़ में उनका स्वागत व अभिनंदन किया, वह पूरे कार्यक्रम का केंद्र बिंदु बन गया।

इस मौके पर उप मुख्यमंत्री केपी मौर्या,के अलावा बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित थे।

प्रियंका सिंह रावत का व्यक्तित्व केवल राजनीतिक पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि वह आवाम की धड़कन और कार्यकर्ताओं की ताक़त मानी जाती हैं। लखनऊ एयरपोर्ट पर उनका सहज व्यवहार, सधे हुए शब्द और विनम्र मुस्कान यह बताने के लिए काफी थी कि राजनीति अगर सेवा से जुड़ जाए, तो वह भरोसे का रूप ले लेती है।

हर दिल से जुड़ने वाली नेता

प्रियंका सिंह रावत की सबसे बड़ी पहचान यही है कि वह हर वर्ग, हर धर्म और हर उम्र के लोगों से समान आत्मीयता के साथ जुड़ी रहती हैं।
गरीबों के लिए सहारा,
बुज़ुर्गों के लिए सम्मान,
और बेटियों के लिए उम्मीद—
उनकी राजनीति इन्हीं मूल्यों के इर्द-गिर्द घूमती है।

वह गरीबों और बुज़ुर्गों के दिलों में बेटी की मोहब्बत बनकर बसती हैं, वहीं बेटियों की शिक्षा और आत्मसम्मान के लिए उनका समर्पण उन्हें एक सामाजिक मार्गदर्शक के रूप में स्थापित करता है।

विचारों में राष्ट्र, कर्म में सेवा

इस मुलाक़ात के बाद प्रियंका सिंह रावत ने सोशल मीडिया पर अपने विचार साझा करते हुए लिखा कि—

आज़ादी के बाद गृहमंत्री के रूप में सरदार पटेल ने जिस भारतीयता की पहचान स्थापित की थी, उसे आज श्री अमित शाह एक बार फिर लौहपुरुष की भूमिका में मज़बूती प्रदान कर रहे हैं।

यह बयान उनके राष्ट्रवादी दृष्टिकोण और देश की एकता के प्रति उनके अटूट विश्वास को दर्शाता है।

औपचारिकता नहीं, जनभावना का प्रतीक

यह स्वागत सिर्फ एक राजनीतिक औपचारिकता नहीं था, बल्कि बाराबंकी की जनता की ओर से देश के गृहमंत्री के प्रति सम्मान और विश्वास का प्रतीक भी था।
प्रियंका सिंह रावत ने अपने आचरण और शब्दों से यह स्पष्ट कर दिया कि राजनीति का असली उद्देश्य सत्ता नहीं, सेवा और संवाद है।

आज प्रियंका सिंह रावत उस राजनीति की मिसाल बनती जा रही हैं, जहाँ
नेतृत्व में विनम्रता है,
व्यवहार में अपनापन है,
और सेवा में निष्ठा।


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