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बाराबंकी में स्वास्थ्य सेवाओं की नई सुबह,जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी ने रफी अहमद किदवई स्मारक जिला चिकित्सालय में नव-निर्मित पंजीकरण भवन व जन औषधि केंद्र का किया उद्घाटन

तहलका टुडे टीम/सदाचारी लाला उमेश चंद्र श्रीवास्तव/मोहम्मद वसीक 

बाराबंकी, 20 जनवरी 2026 आमजन को सस्ती, सुलभ और सम्मानजनक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में आज एक ऐतिहासिक पहल साकार हुई। जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी ने रफी अहमद किदवई स्मारक जिला चिकित्सालय (पुरुष) में नव-निर्मित पंजीकरण भवन एवं प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र का विधिवत उद्घाटन किया।

इस अवसर पर अस्पताल परिसर केवल एक भवन के उद्घाटन का साक्षी नहीं बना, बल्कि आम मरीजों के लिए समय, सम्मान और सुविधा की नई उम्मीद का केंद्र भी बना।

🖥️ अब लाइन नहीं, इंतज़ार नहीं — घर बैठे बनेगा पर्चा

जिलाधिकारी ने ऑनलाइन पंजीकरण प्रणाली (Link to HIS) का शुभारंभ करते हुए कहा कि अब मरीज घर बैठे या कहीं से भी अपना पर्चा ऑनलाइन बना सकेंगे। अस्पताल पहुंचते ही वे सीधे चिकित्सक के कक्ष में जाकर परामर्श ले सकेंगे।
इस व्यवस्था से—

  • लंबी कतारों से राहत
  • भीड़ में कमी
  • समय की बचत
  • बुजुर्गों, महिलाओं और गंभीर रोगियों को विशेष सुविधा

जैसे अनेक लाभ सुनिश्चित होंगे।

💊 सस्ती दवाइयों से राहत, इलाज में भरोसा

प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र के शुभारंभ से अब वे दवाइयां भी कम कीमत पर उपलब्ध होंगी, जो कई बार अस्पताल में उपलब्ध नहीं होतीं। इससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मरीजों को इलाज में बड़ी राहत मिलेगी।

👩‍⚕️👨‍⚕️ स्वास्थ्य सेवाओं के सिपाही एक मंच पर

इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग के अनेक वरिष्ठ अधिकारी, चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ और कर्मचारी उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से—

  • डा० अवधेश कुमार यादव, मुख्य चिकित्साधिकारी
  • डा० जय प्रकाश मौर्य, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (पुरुष)
  • डा० प्रदीप कुमार, जिला महिला चिकित्सालय
  • डा० विनोद पाल सिंह, प्रभारी पैथोलॉजी/ब्लड बैंक
  • डा० राजेश कुशवाहा, वरिष्ठ परामर्शदाता
  • डा० वीरेंद्र सिंह, चिकित्सा अधीक्षक
  • राज कुमार वर्मा, हॉस्पिटल मैनेजर

साथ ही निर्माणकारी संस्था के अभियंता, मैट्रन श्रीमती मधु जायसवाल, स्टाफ नर्स, मीडिया प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में मरीजों के परिजन भी मौजूद रहे।

🌱 भरोसे, सुविधा और संवेदना का संगम

यह उद्घाटन केवल एक प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह संदेश था कि सरकारी अस्पताल भी आधुनिक, संवेदनशील और मरीज-केंद्रित हो सकते हैं
बाराबंकी का यह कदम आने वाले समय में जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की मजबूत नींव बनता दिख रहा है।

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