तहलका टुडे टीम
बाराबंकी।लोकतंत्र की चौथी स्तंभ कही जाने वाली पत्रकारिता आज जिन चुनौतियों से जूझ रही है, उनमें सबसे बड़ी चुनौती है— सुरक्षा और सम्मान। इन्हीं सरोकारों को लेकर ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन उत्तर प्रदेश के जिलाध्यक्ष संतोष शुक्ला की अगुवाई में पत्रकारों का एक प्रतिनिधिमंडल प्रदेश के राज्यमंत्री सतीश शर्मा से मिला और सात सूत्रीय मांग पत्र उन्हें सौंपा।
यह मुलाक़ात केवल एक औपचारिक ज्ञापन तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह ग्रामीण पत्रकारों के संघर्ष, पीड़ा और अधिकारों की सशक्त अभिव्यक्ति बनी। राज्यमंत्री सतीश शर्मा ने पूरे मनोयोग से ज्ञापन को पढ़ा और भरोसा दिलाया कि इसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंचाकर समस्याओं के समाधान के लिए गंभीर प्रयास किए जाएंगे।
“पत्रकार अपराधी नहीं, सच के प्रहरी हैं”
इस अवसर पर जिलाध्यक्ष संतोष शुक्ला ने कहा कि पत्रकार जब सच्चाई सामने लाते हैं, तो कई बार उन्हें दबाने के लिए झूठे मुकदमों का सहारा लिया जाता है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में मांग की कि
पत्रकारिता के दायित्व निर्वहन के दौरान उत्पन्न किसी विवाद में पत्रकार पर एफआईआर दर्ज करने से पहले किसी सक्षम राजपत्रित अधिकारी द्वारा निष्पक्ष जांच अनिवार्य की जाए।
सात सूत्रीय मांगों में क्या है खास
श्री शुक्ला ने बताया कि संगठन की मांगें केवल सुविधाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह पत्रकारों की गरिमा, सुरक्षा और भविष्य से जुड़ी हैं—
- तहसील स्तर पर सभी दैनिक समाचार पत्रों के संवाददाताओं को मान्यता प्रदान करने के स्पष्ट आदेश
- जिला, मंडल व तहसील स्तर पर पत्रकार हितों के लिए स्थाई समिति का गठन, जिसमें ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन को विशेष आमंत्रित सदस्य बनाया जाए
- ग्रामीण पत्रकारों को आयुष्मान भारत योजना से जोड़ा जाए
- उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की बसों में पत्रकारों को निःशुल्क यात्रा सुविधा
- प्रदेश स्तरीय पत्रकार मान्यता व विज्ञापन समितियों में संगठन के दो प्रतिनिधियों को सदस्यता
- राजधानी लखनऊ में ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन के लिए निःशुल्क कार्यालय भवन
- ग्रामीण पत्रकारों की समस्याओं के अध्ययन व समाधान हेतु ग्रामीण पत्रकार आयोग का गठन
सरकार से उम्मीद
राज्यमंत्री सतीश शर्मा ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि पत्रकारों की यह आवाज़ अनसुनी नहीं जाएगी और सरकार पत्रकार हितों को लेकर संवेदनशील है।
एकजुटता की तस्वीर
इस मौके पर राकेश पाठक, राकेश गिरि, रंजीत गुप्ता, मुकेश मिश्रा, अंकित मिश्रा, विजय शंकर मिश्रा, नीरज शुक्ला, सूरज सिंह, विक्रमादित्य सिंह, उमेश श्रीवास्तव, मो. वसीक सहित कई वरिष्ठ एवं युवा पत्रकार मौजूद रहे। सभी की आंखों में एक ही संदेश था— पत्रकार सुरक्षित होगा, तभी समाज सुरक्षित रहेगा।
यह ज्ञापन सिर्फ मांगों का दस्तावेज़ नहीं, बल्कि उस संघर्ष की कहानी है जो ग्रामीण पत्रकार रोज़ सच लिखते हुए जीते हैं।
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