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दिल्ली में इतिहास लिखती मुलाक़ात,रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से वफ़ा अब्बास की हज़रत अली (अ.स.) इंटरनेशनल सेंट्रल यूनिवर्सिटी, पुरातत्व विभाग की लापरवाही से लेकर वक़्फ़ ट्रिब्यूनल तक के मामलों में गुफ़्तगू,जब आँखों की रौशनी और उम्मीद, समाज के नाम पैग़ाम बन गई


तहलका टुडे टीम 

नई दिल्ली — कुछ मुलाक़ातें औपचारिक होती हैं और कुछ इतिहास का हिस्सा बन जाती हैं। राजधानी दिल्ली में देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से वफ़ा अब्बास, चेयरमैन अंबर फाउंडेशन, की हुई मुलाक़ात दूसरी क़िस्म की थी—जहाँ बात सिर्फ़ मुद्दों की नहीं, मुल्क के भविष्य, समाज की उम्मीद और इंसाफ़ की पुकार की थी।

यह भेंट महज़ शिष्टाचार नहीं रही, बल्कि शिक्षा, सामाजिक न्याय, जनसेवा, सांस्कृतिक विरासत और वक़्फ़ सुधार जैसे संवेदनशील राष्ट्रीय विषयों पर दिल से दिल तक संवाद का मंच बनी।

वफ़ा अब्बास ने  कहा—

“मज़बूत राष्ट्र की बुनियाद इमारतों से नहीं, बल्कि इल्म, इंसाफ़ और इंसानी बराबरी से रखी जाती है।”

हज़रत अली (अ.स.) इंटरनेशनल सेंट्रल यूनिवर्सिटी — इल्म से किरदार तक

मुलाक़ात का सबसे अहम और दूरगामी विषय रहा हज़रत अली अलैहिस्सलाम इंटरनेशनल सेंट्रल यूनिवर्सिटी 
वफ़ा अब्बास ने कहा कि यह संस्थान सिर्फ़ डिग्रियाँ बाँटने वाला केंद्र नहीं, बल्कि सोच, नैतिकता और ज़िम्मेदारी गढ़ने वाला चिराग़ बनेगा।

प्रस्तावित विश्वविद्यालय में—

  • आधुनिक विज्ञान और तकनीक
  • क़ानून और सामाजिक विज्ञान
  • मानविकी और नैतिक शिक्षा

को समान महत्व दिया जाएगा, ताकि छात्र कुशल पेशेवर ही नहीं, बेहतर इंसान बनें।
👉 ज़मीन को लेकर भी तफ़सीली और व्यावहारिक चर्चा हुई, जिससे इस सपने को हक़ीक़त की ज़मीन मिल सके।

‘कलेक्टर बिटिया’ — जब बेटियाँ सिर्फ़ सपना नहीं, मुक़ाम तय करती हैं

बात आगे बढ़ी तो ‘कलेक्टर बिटिया’ अभियान पर भी गंभीर चर्चा हुई।
वफ़ा अब्बास ने कहा—

“जब बेटियों को मौक़ा मिलता है, तो वे सिर्फ़ अपने घर नहीं, पूरे समाज की तक़दीर बदल देती हैं।”

यह मुहिम बेटियों को शिक्षा, आत्मनिर्भरता और प्रशासनिक सेवाओं की ओर ले जाने का सशक्त माध्यम बन चुकी है।

आँखों की रौशनी — और ज़िंदगी की उम्मीद

गरीब और ज़रूरतमंद लोगों के लिए चलाए जा रहे
मोतियाबिंद ऑपरेशन और निःशुल्क चश्मा वितरण कार्यक्रमों पर भी विस्तार से चर्चा हुई।

वफ़ा अब्बास के शब्दों में—

“जब किसी की आँखों में रौशनी लौटती है, तो वह सिर्फ़ एक इलाज नहीं होता,
वह पूरे परिवार के लिए नई ज़िंदगी की शुरुआत होती है।”

यहीं से यह मुलाक़ात उम्मीद का पैग़ाम बन गई।

नदवा पोस्ट ऑफिस — सहूलियत नहीं, ज़रूरत

स्थानीय जनता की रोज़मर्रा की ज़िंदगी से जुड़े नदवा पोस्ट ऑफिस का मुद्दा भी बैठक में पूरी गंभीरता से उठाया गया।
डाक सेवाओं को आम नागरिकों के लिए अनिवार्य बताते हुए
👉 इसे यहाँ से न हटाए जाने की साफ़ माँग रखी गई।

पुरातत्व विभाग की लापरवाही और विरासत की पुकार

बैठक में दरगाहों, इमामबाड़ों और ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों की जर्जर हालत पर भी चिंता जताई गई।
वफ़ा अब्बास ने कहा—

“ये इमारतें सिर्फ़ आस्था का केंद्र नहीं,
हमारी गंगा-जमुनी तहज़ीब और साझा इतिहास की ज़िंदा निशानी हैं।”

पुरातत्व विभाग के माध्यम से इनके संरक्षण और मरम्मत पर विशेष ज़ोर दिया गया।

वक़्फ़ ट्रिब्यूनल — इंसाफ़ की राह में रुकी हुई सांसें

मुलाक़ात का सबसे संवेदनशील मुद्दा रहा
वक़्फ़ ट्रिब्यूनल में शीघ्र सदस्य की नियुक्ति

वफ़ा अब्बास ने बताया कि लंबे समय से पद रिक्त रहने के कारण

  • हज़ारों मामले लंबित हैं
  • इंसाफ़ देर से मिल रहा है
  • और वक़्फ़ संपत्तियों को गंभीर नुकसान हो रहा है

उन्होंने सदस्य नियुक्ति की गंभीर गुज़ारिश करते हुए कहा कि इससे
तेज़, पारदर्शी और निष्पक्ष न्याय का रास्ता खुलेगा।

रक्षा मंत्री का संवेदनशील और सकारात्मक रुख

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सभी बिंदुओं को ध्यानपूर्वक सुना और
शिक्षा, समाजसेवा, विरासत संरक्षण व न्याय से जुड़े मुद्दों पर
सकारात्मक और संवेदनशील दृष्टिकोण दिखाया।
उन्होंने आश्वस्त किया कि संबंधित विभागों के साथ आवश्यक कार्रवाई पर विचार किया जाएगा।

एक मुलाक़ात, जो पैग़ाम बन गई

यह मुलाक़ात सिर्फ़ एक खबर नहीं,
👉 इल्म की रौशनी
👉 इंसाफ़ की उम्मीद
👉 विरासत की हिफ़ाज़त
👉 और कमज़ोरों की आवाज़

बनकर उभरी है।

जब नीयत साफ़ हो और मक़सद समाज हो —
तो मुलाक़ातें इतिहास लिखती हैं।

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