रिपोर्ट: मोहम्मद वसीक /तहलका टुडे न्यूज़ पोर्टल
बाराबंकी। सामाजिक बराबरी और इंसाफ़ का संदेश देने वाले मशहूर शेर—
“एक ही सफ़ में खड़े हो गए महमूद ओ अयाज़,
न कोई बंदा रहा और न कोई बंदा नवाज़”—
की गूंज के बीच बाराबंकी के गांधी भवन में आयोजित ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज़ के जिला स्तरीय सम्मेलन ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया।
गांधी जी की प्रतिमा के साये में आयोजित इस सम्मेलन में पसमांदा मुस्लिम समाज ने न केवल आरक्षण और आबादी के अनुपात में राजनीतिक हिस्सेदारी की मांग दोहराई, बल्कि 2027 विधानसभा चुनाव के लिए अपनी ठोस रणनीति का भी ऐलान कर दिया।
अध्यक्षता, मुख्य अतिथि और प्रमुख वक्ता
सम्मेलन की अध्यक्षता हाजी नूरुल हसन (जिलाध्यक्ष) ने की।
मुख्य अतिथि के रूप में वसीम राईन (राष्ट्रीय उपाध्यक्ष) ने विस्तृत राजनीतिक विश्लेषण प्रस्तुत किया।
विशिष्ट अतिथि वकार हवारी (राष्ट्रीय महासचिव) ने केंद्र और प्रदेश सरकार की योजनाओं पर अपने विचार रखे।
इसके अलावा मंच पर नूर मोहम्मद राईन (जिला महामंत्री) की सक्रिय भूमिका रही।
“मुस्लिम वोट” की राजनीति पर सवाल
वसीम राईन ने कहा कि पसमांदा समाज—जिसमें अंसारी, राईन, मंसूरी, सलमानी, धोबी, फ़क़ीर, मनिहार, हलवाई, नट, बंजारा समेत अनेक बिरादरियां शामिल हैं—संख्या के लिहाज से मजबूत है, लेकिन राजनीतिक प्रतिनिधित्व में पिछड़ा हुआ है।
उन्होंने कहा कि दशकों से “मुस्लिम वोट बैंक” की अवधारणा ने वास्तविक सामाजिक असमानता को ढक दिया। अशराफ तबके के नेतृत्व ने राजनीतिक दलों को यह भरोसा दिलाया कि पूरा मुस्लिम समाज एकजुट है, लेकिन टिकट वितरण और सत्ता में हिस्सेदारी के समय पसमांदा समाज को पीछे छोड़ दिया गया।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब पसमांदा समाज भावनात्मक नारों से नहीं, बल्कि अधिकार आधारित राजनीति करेगा।
आरक्षण और संस्थागत भागीदारी की ठोस मांग
सम्मेलन में निम्न प्रमुख मांगें रखी गईं—
- आबादी के अनुपात में विधानसभा और स्थानीय निकाय चुनावों में टिकट
- वक्फ बोर्ड, मदरसा बोर्ड और अन्य स्वायत्त संस्थाओं में पसमांदा प्रतिनिधियों का मनोनयन
- मुस्लिम पिछड़ी जातियों के युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हेतु विशेष सहायता
- पसमांदा बहुल जिलों में उद्योग, हथकरघा और हस्तशिल्प के लिए फैसिलिटेशन सेंटर
- प्रशासनिक पदों पर पसमांदा अधिकारियों की तैनाती के प्रयास
- 2027 चुनाव हेतु सोशल मीडिया वार रूम और प्रचार रणनीति
मोदी–योगी सरकार के समर्थन से बदले संकेत
सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की योजनाओं का उल्लेख करते हुए वक्ताओं ने कहा कि आवास योजना, मुफ्त राशन, आयुष्मान योजना, किसानों की बिजली बिल माफी और बुनकरों के लिए 4300 करोड़ रुपये के पैकेज से पसमांदा समाज को सीधा लाभ मिला है।
वकार हवारी ने कहा कि जिस तबके की आवाज़ पहले नहीं सुनी जाती थी, आज उसकी योजनाओं में भागीदारी बढ़ी है। उन्होंने विशेष रूप से बुनकर समुदाय की समस्याओं का जिक्र करते हुए और राहत देने की मांग की।
मोदी–योगी सरकार के समर्थन के इस सार्वजनिक एलान ने विपक्षी दलों, खासकर सपा, के लिए चुनौती खड़ी कर दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पसमांदा वोटों के रुख में बदलाव उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ा असर डाल सकता है।
सम्मेलन में शामिल प्रमुख हस्तियां
सम्मेलन में उपस्थित प्रमुख नाम इस प्रकार रहे—
- हाजी नूरुल हसन – जिलाध्यक्ष
- वसीम राईन – राष्ट्रीय उपाध्यक्ष
- वकार हवारी – राष्ट्रीय महासचिव
- नूर मोहम्मद राईन – जिला महामंत्री
- इकराम राईन – मंडी अध्यक्ष
- इरशाद मलिक – मालिक समाज जिलाध्यक्ष
- सादाब कुरैशी – कुरैशी समाज अध्यक्ष
- गयादीन लोधी – घुमंतू समाज अध्यक्ष
- निसार राईन
- गुफरान राईन
- इसराईल अंसारी – पूर्व जिला पंचायत सदस्य
समेत कई लोगों की प्रभावशाली उपस्थिति रही, जिसने सम्मेलन को शक्ति प्रदर्शन का रूप दे दिया।
2027: पसमांदा राजनीति का निर्णायक मोड़?
गांधी जी की प्रतिमा के समक्ष सामाजिक न्याय और बराबरी की मांग ने प्रतीकात्मक संदेश भी दिया—अब पसमांदा समाज खुद अपनी राजनीतिक दिशा तय करेगा।
यदि यह संगठनात्मक ऊर्जा 2027 तक कायम रहती है, तो उत्तर प्रदेश की मुस्लिम राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत हो सकती है, जहां नारा नहीं, बल्कि आबादी के अनुपात में भागीदारी केंद्र में होगा।
#पसमांदा सम्मेलन #बाराबंकी, #गांधी जी प्रतिमा, #पसमांदा आरक्षण मांग, #यूपी 2027 विधानसभा चुनाव, #मोदी #योगी समर्थन, #मुस्लिम ओबीसी प्रतिनिधित्व
Pasmanda Muslim Mahaz, Gandhi Bhavan Barabanki, UP Politics News, 2027 Assembly Election, Muslim OBC Reservation, Narendra Modi Schemes, Yogi Government Support, Tehelka Today Report
0 Comments