सदाचारी लाला उमेश चंद्र श्रीवास्तव/मोहम्मद वसीक
बाराबंकी- बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के चुनाव में इस बार अगर कोई नाम पूरे आत्मविश्वास, गरिमा और अधिवक्ता समाज के भरोसे के साथ उभर रहा है, तो वह है एडवोकेट अतुल कुमार सिंह। क्रम संख्या 72 से मैदान में उतरे अतुल कुमार सिंह आज सिर्फ़ एक प्रत्याशी नहीं, बल्कि अधिवक्ताओं की उम्मीद, आवाज़ और भविष्य का भरोसा बनते जा रहे हैं।
हाईकोर्ट, लखनऊ में अपनी सशक्त पैरवी, सधी हुई भाषा और कानून की गहरी समझ के लिए पहचाने जाने वाले अतुल कुमार सिंह को एक संयमी, कर्मठ और निडर अधिवक्ता के रूप में जाना जाता है। वे न तो शोर में विश्वास रखते हैं और न ही खोखले वादों में—उनकी पहचान है काम, विचार और परिणाम।
✦ अधिवक्ता हितों के लिए स्पष्ट विज़न
अतुल कुमार सिंह का मानना है कि बार काउंसिल सिर्फ़ एक संस्था नहीं, बल्कि अधिवक्ताओं की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों की ढाल होनी चाहिए।
- जूनियर वकीलों की समस्याएं
- आर्थिक व सामाजिक सुरक्षा
- बार और बेंच के बीच संतुलन
- न्यायिक व्यवस्था में अधिवक्ताओं की गरिमा
इन सभी मुद्दों पर उनका दृष्टिकोण साफ़, व्यावहारिक और ज़मीनी है।
✦ समर्थन नहीं, विश्वास मिल रहा है
आज उनके साथ खड़े अधिवक्ताओं की सूची यह बताने के लिए काफी है कि अतुल कुमार सिंह को समर्थन नहीं, विश्वास मिल रहा है। वरिष्ठ अधिवक्ताओं से लेकर युवा वकीलों तक, हर वर्ग में उनके नाम को लेकर सकारात्मक चर्चा है। यह समर्थन किसी दबाव या समीकरण का नहीं, बल्कि उनके चरित्र, व्यवहार और पेशेवर ईमानदारी का परिणाम है।
✦ सादगी में मजबूती, व्यवहार में सम्मान
जो लोग उन्हें नज़दीक से जानते हैं, वे कहते हैं कि अतुल कुमार सिंह की सबसे बड़ी ताक़त उनकी सादगी है। वे हर अधिवक्ता को बराबरी का सम्मान देते हैं—चाहे वह जूनियर हो या सीनियर। यही वजह है कि वे अदालत के गलियारों में सिर्फ़ जाने नहीं जाते, बल्कि सम्मान के साथ स्वीकार किए जाते हैं।
✦ क्रम संख्या 72: एक नंबर नहीं, एक पहचान
इस चुनाव में क्रम संख्या 72 अब सिर्फ़ एक चुनाव चिन्ह नहीं रह गया है, बल्कि यह
- ईमानदारी का प्रतीक
- संघर्ष की पहचान
- और अधिवक्ता एकता की आवाज़
बनता जा रहा है।
बार काउंसिल चुनाव में बहुत से चेहरे आते-जाते हैं, लेकिन कुछ नाम इतिहास बनाते हैं। मौजूदा माहौल और अधिवक्ताओं के रुझान को देखें, तो यह कहना गलत नहीं होगा कि एडवोकेट अतुल कुमार सिंह उसी श्रेणी में खड़े नज़र आ रहे हैं।
अब निगाहें मतदान पर हैं, लेकिन इतना तय है—
अतुल कुमार सिंह ने दिल जीत लिए हैं, और जब दिल साथ हों, तो जीत दूर नहीं होती।
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