सदाचारी लाला उमेश चंद्र श्रीवास्तव
बाराबंकी। कोतवाली नगर क्षेत्र में सोमवार देर शाम पत्रकार पर दबंगों के हमले की घटना से पूरे पत्रकार समाज में आक्रोश फैल गया है। जानकारी के अनुसार दबंगों के एक समूह ने शाम लगभग 6 बजे शिवपुरी मोहल्ले में रहने वाले पत्रकार रंजीत गुप्ता, जो राजधानी से प्रकाशित एक हिन्दी दैनिक अख़बार के जिला संवाददाता हैं, के घर पर धावा बोल दिया। दबंगों ने घर का दरवाज़ा तोड़ने का प्रयास किया, जमकर गाली-गलौज की और पत्थरबाजी करते हुए घर में तोड़फोड़ का प्रयास किया।
पीड़ित पत्रकार ने तत्काल घटना की सूचना फोन से कोतवाली प्रभारी नगर को दी। मौके पर जेल चौकी प्रभारी संजय यादव दो पुलिसकर्मियों के साथ पहुंचे, लेकिन दबंगों की दबंगई के सामने पुलिस मूकदर्शक बनी रही। दबंगों ने खुलेआम पुलिस के सामने कहा—
“हाँ, हमने ही तोड़फोड़ की है, आगे भी करते रहेंगे”
इसके बाद चौकी प्रभारी बिना किसी कार्रवाई के बैरंग लौट गए, जिससे क्षेत्रीय पत्रकारों में भारी नाराज़गी फैल गई।
✊ पत्रकारों का प्रदर्शन, एसपी को ज्ञापन
मंगलवार सुबह ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन उ.प्र. के जिलाध्यक्ष संतोष शुक्ला संगठन के पदाधिकारी अंकित मिश्रा, श्रीनिवास त्रिपाठी, आसिफ़ हुसैन, उमेश चंद्र श्रीवास्तव आदि के साथ पीड़ित पत्रकार को लेकर पुलिस अधीक्षक अर्पित विजयवर्गीय से मुलाकात की और घटना की लिखित शिकायत सौंप दी।
एसपी ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तत्काल चौकी प्रभारी को कड़ी फटकार लगाई और मुकदमा दर्ज करने के निर्देश जारी किए। इसके बाद कोतवाली पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
📌 घटना की वजह – बिजली चोरी का मामला!
पीड़ित पत्रकार रंजीत गुप्ता ने बताया कि मोहल्ले के दबंग लंबे समय से कटिया लगाकर बिजली चोरी कर रहे थे। हाल ही में विद्युत विभाग ने छापेमारी की और उन्हें रंगे हाथ पकड़कर बिजली चोरी अधिनियम में मुकदमा दर्ज किया, साथ ही जुर्माना भी लगाया।
दबंगों को शक था कि यह शिकायत पत्रकार के घर किराए पर रहने वाली एक युवती ने की है, इसी शक में उन्होंने पत्रकार के घर पर हमला बोल दिया।
🛡 पुलिस का बयान
जेल चौकी प्रभारी संजय यादव ने कहा—
“मुकदमा पंजीकृत कर लिया गया है, जांच करके कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”
🟥 पत्रकार समाज में उबाल
स्थानीय पत्रकारों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो जिलास्तरीय आंदोलन किया जाएगा। पत्रकारों का कहना है कि
“सच लिखने और भ्रष्टाचार उजागर करने की कीमत हिंसा और उत्पीड़न से नहीं चुकाई जा सकती।”
यह घटना न केवल पत्रकार की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाती है, बल्कि प्रशासन की कार्यशैली पर भी प्रश्नचिह्न लगाती है। लोकतंत्र का चौथा स्तंभ यदि असुरक्षित है, तो इसका असर पूरे समाज पर पड़ेगा। पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग फिर से तेज हो गई है।
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