लखनऊ, 15 अक्टूबर 2025
राजधानी लखनऊ में हुए एक सनसनीख़ेज़ और अफ़सोसनाक वाक़िये ने पूरे देशभर में ग़म और ग़ुस्से की लहर पैदा कर दी है। वक़्फ़ बचाओ तहरीक के अगुआ और भारत की सुप्रीम रिलीजियस अथॉरिटी आफ़ताब-ए-शरीअत, हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मौलाना डॉ. सैयद कल्बे जवाद नक़वी पर 13 अक्टूबर को माफ़ियाओं के गिरोह ने हमला कर दिया।
यह हमला उस समय हुआ जब मौलाना साहब अपने वुक़ला और करबला अब्बास बाग़ के मैनेजर साहब के साथ वक़्फ़ की उस ज़मीन का मुआयना कर रहे थे, जिस पर भू-माफ़िया पहले ही बड़े पैमाने पर क़ब्ज़ा कर चुके है और अब बची-कुची ज़मीन को भी हड़पने की कोशिश कर रहा है। बताया जाता है कि जैसे ही मौलाना साहब की गाड़ी वहाँ से वापस लौटी, माफ़ियाओं के मुसल्लह गिरोह ने गाड़ियों में भरकर आकर हमला बोल दिया। गालियाँ दीं, नारेबाज़ी की और इस पूरी घटना को फ़िर्क़ावाराना रंग देने की नाकाम कोशिश की।
✒ तंजीमुल मकातिब का बयान
भारत की सबसे बड़ी मज़हबी तंजीम तंजीमुल मकातिब, जिसके ज़ेरे निगरानी इस वक़्त मुल्कभर में 1200 से अधिक मकतब मज़हबी तालीम की शमा जलाए हुए हैं, ने इस हमले को पूरी क़ौम की तौहीन बताया है।
तंजीमुल मकातिब के सेक्रेट्री मौलाना सैयद सफ़ी हैदर जैदी ने बयान जारी करते हुए कहा:
“मौलाना कल्बे जवाद साहब कई दशकों से वक़्फ़ बचाओ तहरीक और दूसरे क़ौमी मसाइल में रहनुमाई कर रहे हैं। उनकी बेबाक आवाज़, इत्तेहाद-ए-मुस्लिमीन के लिए काविशें और यौमे क़ुद्स से लेकर अहतमाम-ए-अज़ादारी तक की सेवाएँ बार-बार शरपसंद ताक़तों की साज़िशों को नाकाम करती रही हैं। यह हमला किसी एक इंसान पर नहीं बल्कि पूरी क़ौम की पहचान, तशख़्ख़ुस और वक़ार पर हमला है।”
⚠️ सोशल मीडिया की ग़लत हवा और माफ़ियाओं की साज़िश
अपने बयान में मौलाना सफ़ी हैदर जैदी ने यह भी कहा कि कुछ सोशल मीडिया के तथाकथित सूरमा अक्सर यह आवाज़ उठाते हैं कि क़ायेद बदला जाए, जबकि हक़ीक़त यह है कि मौलाना कल्बे जवाद साहब को किसी मीटिंग या इलेक्शन से क़ायेद नहीं बनाया गया। बल्कि उनकी निडरता, बेबाकी और क़ौम के लिए हर वक़्त जोख़िम उठाने की वजह से लोग उन्हें क़ायेद कहते और मानते हैं।
उन्होंने कहा —
“वक़्फ़ की जायदाद पर माफ़ियाओं के बढ़ते क़ब्ज़े और प्रशासन की बेरुख़ी ने हालात को नाज़ुक बना दिया है। मौलाना साहब पर हुआ यह हमला दरअसल वहीँ ताक़तों का सोचा-समझा प्लान है जो क़ौम को लीडरशिप से महरूम करना चाहते हैं।”
✊ सरकार से मांगें
तंजीमुल मकातिब ने इस बयान में सरकार-ए-उत्तर प्रदेश से चार अहम मांगें रखीं:
- इस हमले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जाँच हो।
- हमले में शामिल सभी माफ़ियाओं, उनके गुर्गों और सरगनाओं को तुरंत गिरफ़्तार कर सख़्त से सख़्त सज़ा दी जाए।
- आलिमे दीन और क़ौमी रहनुमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
- वक़्फ़ की जायदाद पर क़ब्ज़ा करने वाले भू-माफ़ियाओं और उनके संरक्षकों पर क़ानूनी शिकंजा कसा जाए।
📢 क़ौम से अपील
अपने बयान में तंजीमुल मकातिब ने क़ौम से अपील की:
“यह मामला मौलाना कल्बे जवाद साहब का नहीं बल्कि पूरी क़ौम का है। कोई यह न सोचे कि इससे हमें क्या लेना-देना। अगर आज हमारी सबसे बड़ी शख़्सियत निशाना बन सकती है तो कल हम में से कोई भी सुरक्षित नहीं रहेगा। लिहाज़ा यह ज़रूरी है कि क़ानून के दायरे में रहते हुए पुरज़ोर एहतिजाज किया जाए और इंसाफ़ की आवाज़ बुलंद की जाए।”
मौलाना डॉ. कल्बे जवाद नक़वी पर हमला न सिर्फ़ एक आलिमे दीन पर हमला है, बल्कि यह क़ौम की अस्मिता, पहचान और धार्मिक नेतृत्व को चोट पहुँचाने की नाकाम कोशिश है। इस वारदात ने फिर साबित कर दिया है कि भू-माफ़िया और असामाजिक ताक़तें किस हद तक जा सकती हैं। अब यह देखना होगा कि सरकार इस मामले में कितनी गंभीरता दिखाती है और क्या इंसाफ़ व हिफ़ाज़त का हक़ अदा किया जाता है या नहीं।
👉 इस पूरे घटनाक्रम ने लखनऊ ही नहीं बल्कि पूरे देशभर के अहलेबैत परस्त समुदाय को हिला दिया है। हर ज़बान पर यही सवाल है — “अगर आफ़ताबे-शरीअत मौलाना कल्बे जवाद नक़वी साहब महफ़ूज़ नहीं तो फिर कौन महफ़ूज़ है?”
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