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बाराबंकी के लाल Mohd Fras Abbas ने देशभर में हासिल की 59वीं रैंक, UGC NET (Law) में JRF पाकर रचा इतिहास

तहलका टुडे टीम

बाराबंकी/दिल्ली:ज़िला बाराबंकी एक बार फिर शिक्षा के मानचित्र पर गौरवान्वित हुआ है। मोहम्मद फ्रॉस अब्बास (Mohammad Fras Abbas), पुत्र वकार अब्बास, ने UGC NET (Law) परीक्षा में शानदार सफलता प्राप्त करते हुए 59वीं रैंक हासिल की है और देश की केवल 0.7% मेधावी सूची में स्थान बनाकर Junior Research Fellowship (JRF) प्राप्त की है।

यह परीक्षा भारत सरकार की ओर से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा आयोजित की जाती है, जिसमें देश भर से इस बार लगभग 25,000 प्रतिभागियों ने कानून विषय में भाग लिया था। उनमें से फिरास अब्बास ने 99.7570517 पर्सेंटाइल के साथ टॉप परफॉर्मर के रूप में अपनी जगह सुनिश्चित की। यह न केवल उनके परिवार और शिक्षकों के लिए बल्कि पूरे बाराबंकी के लिए भी गर्व का क्षण है।

शिक्षा की मजबूत नींव, प्रेरणा और संघर्ष

मूल रूप से उत्तर प्रदेश के ज़िला बाराबंकी से ताल्लुक रखने वाले फ्रॉस अब्बास ने अपनी स्कूली शिक्षा लखनऊ के प्रतिष्ठित Unity College से प्राप्त की। यहीं से उनकी अकादमिक यात्रा ने एक स्पष्ट दिशा पाई। फ्रॉस बताते हैं कि यूनिटी कॉलेज के शिक्षकों और प्रशासन ने उन्हें जिस तरह से प्रोत्साहित किया, वह उनकी ज़िंदगी का मील का पत्थर साबित हुआ।

इसके बाद उन्होंने जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्ली से BA LLB की डिग्री हासिल की और वर्तमान में वहीँ से LL.M (Master of Laws) कर रहे हैं।

दादा से विरासत में मिली ज्ञान की प्रेरणा

फ्रॉस अब्बास ने अपनी सफलता के पीछे अपने दादा, जनाब डॉ. इक्तेदार हुसैन का विशेष उल्लेख किया, जो स्वयं एक प्रतिष्ठित प्रोफेसर रह चुके हैं। उनका सान्निध्य और मार्गदर्शन ही फिरास के लिए उच्च शिक्षा की ओर पहला कदम था। वे कहते हैं, "दादा ने हमेशा यह कहा कि शिक्षा ही असल विरासत है, और इसी को अपनी ताक़त बनाओ।"

माता-पिता की दुआएं, खुद की मेहनत और अल्लाह की रहमत

फ्रॉस अब्बास ने अपनी कामयाबी का श्रेय पूरी विनम्रता से अपने माता-पिता की दुआओं, खुद की लगन, और खुदा की मेहरबानी को दिया। वे कहते हैं,

“कोशिश भी कर, उम्मीद भी रख, रास्ता भी चुन,
फिर इस के ब’अद थोड़ा मुक़द्दर तलाश कर।”

उनके इस शेर ने न सिर्फ़ उनकी सोच को उजागर किया बल्कि आज के युवा वर्ग के लिए एक गहरी प्रेरणा भी छोड़ी।

गर्व का विषय बना जामिया और बाराबंकी

जामिया मिल्लिया इस्लामिया में फ्रॉस की इस उपलब्धि को लेकर शिक्षकों और सहपाठियों में अत्यंत हर्ष का वातावरण है। वहीं, बाराबंकी में भी यह खबर परिवार, शुभचिंतकों और शिक्षा प्रेमियों के बीच एक गर्व और गौरव का विषय बनी हुई है।

फ्रॉस अब्बास: एक नई उम्मीद

उनकी यह सफलता आज के युवाओं को यह पैग़ाम देती है कि – सीमित संसाधनों, छोटे शहर और साधारण पृष्ठभूमि के बावजूद, यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत में सच्चाई हो तो कोई भी मंज़िल दूर नहीं। आज फिरास न केवल पीएचडी के लिए सरकारी फेलोशिप के पात्र बन गए हैं, बल्कि वे भविष्य में किसी राष्ट्रीय विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर बनकर शिक्षा की लौ जलाने के मार्ग पर अग्रसर हैं।

Mohd Fras Abbas की यह सफलता उन तमाम छात्रों के लिए प्रेरणास्त्रोत है जो कड़ी मेहनत, सच्चे इरादे और परिवार की दुआओं के साथ अपने सपनों को हकीकत में बदलना चाहते हैं।

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