📰 तहलका टुडे डेस्क/सदाचारी लाला उमेश चंद्र श्रीवास्तव
बाराबंकी, उत्तर प्रदेश।
बाराबंकी के प्रतिष्ठित सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में उस वक़्त अफरा-तफरी मच गई जब कक्षा 11 की छात्रा नंदनी वर्मा की अचानक क्लास में तबीयत बिगड़ गई और कुछ ही घंटों में उसकी मौत की पुष्टि हो गई। यह घटना न केवल स्कूल के छात्रों और शिक्षकों के लिए सदमे जैसी थी, बल्कि पूरे जिले के शिक्षा जगत को झकझोर देने वाली बन गई।
📌 कौन थी नंदनी वर्मा?
नंदनी वर्मा मूल रूप से टिकैतनगर क्षेत्र के नियामतगंज गांव की रहने वाली थी। वह अपनी तीनों बहनों के साथ शहर में रहकर पढ़ाई कर रही थी। नंदनी का सपना कुछ बड़ा करने का था। वह पढ़ाई में बेहद मेधावी थी, और हाई स्कूल परीक्षा में जिले की टॉप-10 छात्राओं में शामिल रही थी। शिक्षकों की प्रिय और सहपाठियों के बीच प्रेरणा बनी नंदनी अचानक इतनी जल्दी हमसे दूर चली जाएगी, इसका अंदाज़ा किसी को नहीं था।
🕯️ अचानक गिरी, और फिर नहीं उठी…
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटना के ठीक 5 मिनट पहले तक नंदनी पूरी तरह स्वस्थ और सामान्य अवस्था में थी। वह अपनी सहेलियों के साथ हँसी-मज़ाक कर रही थी। अचानक क्लासरूम में बेहोश हो गई। शिक्षक व स्टाफ ने तत्काल उसे जिला ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
🧪 मौत का कारण अभी भी रहस्य
विद्यालय के प्रधानाचार्य के अनुसार, नंदनी को किसी प्रकार की स्वास्थ्य शिकायत नहीं थी। ऐसे में उसका अचानक बेहोश होना और मृत्यु होना कई सवाल खड़े करता है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जिससे वास्तविक कारणों का खुलासा हो सके।
🏫 स्कूलों में मेडिकल सिस्टम क्यों नदारद है?
इस दर्दनाक घटना ने शिक्षा व्यवस्था में चिकित्सा संबंधी लापरवाही की ओर ध्यान खींचा है। क्या आप जानते हैं:
✅ 90% स्कूलों में एमरजेंसी मेडिकल किट उपलब्ध नहीं होती।
✅ अधिकतर संस्थानों में ऑक्सीजन सिलेंडर, स्ट्रेचर या प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ नहीं होता।
✅ बच्चों का कोई स्वास्थ्य बीमा (इंश्योरेंस) नहीं होता, जिससे इमरजेंसी में खर्च की जिम्मेदारी कोई नहीं लेता।
✅ एम्बुलेंस सुविधा तो दूर, आसपास के अस्पताल से भी कोई तत्कालिक सहयोग तंत्र नहीं होता।
📣 लापरवाही या सिस्टम की चूक?
यह केवल एक हादसा नहीं, एक चेतावनी है। नंदनी की मौत बताती है कि हमारे स्कूलों में बच्चों की जान की रक्षा के लिए बुनियादी इंतजाम तक नहीं हैं। स्कूल प्रबंधन, शिक्षा विभाग और शासन—सभी को जवाब देना होगा:
- क्या स्कूलों का मेडिकल ऑडिट हुआ?
- क्या कोई हेल्थ इमरजेंसी ड्रिल कराई जाती है?
- क्या बच्चों के हेल्थ डेटा का रिकॉर्ड रखा जाता है?
🧒 एक मासूम सपना, अधूरा रह गया
नंदनी जैसी छात्राएं जिले की आशा और भविष्य की रोशनी होती हैं। उनकी आंखों में देश के लिए सपने होते हैं। लेकिन जब सिस्टम ऐसे हो कि वह उन्हें जीने तक का मौका न दे, तो यह महज़ अफसोस नहीं — एक अपराध है।
📷 तहलका टुडे अपील करता है — अब तो जागिए!
✔️ सभी स्कूलों में बेसिक मेडिकल किट अनिवार्य की जाए
✔️ स्कूल स्तर पर प्राथमिक स्वास्थ्य प्रशिक्षण दिया जाए
✔️ बच्चों का समूह हेल्थ इंश्योरेंस लागू हो
✔️ शिक्षा विभाग हर स्कूल का स्वास्थ्य ऑडिट करे
✍️ नंदनी की मौत पर मौन क्यों है शिक्षा विभाग?
तहलका टुडे ने जिला शिक्षा अधिकारी से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन अब तक कोई अधिकारिक बयान सामने नहीं आया। वहीं स्कूल प्रशासन खुद को ‘बेगुनाह’ बता रहा है और जांच का हवाला दे रहा है।
🙏 श्रद्धांजलि नहीं, बदलाव चाहिए!
“हम फूलों की तरह बच्चे संवारते हैं,
मगर जब वो मुरझा जाएँ तो जिम्मेदार कौन?”
नंदनी वर्मा की असामयिक मौत को यदि हम सिर्फ एक खबर बनाकर भूल जाएंगे, तो अगली नंदनी की मौत के भी हम ही जिम्मेदार होंगे।
अब जवाबदेही चाहिए। इंसाफ़ चाहिए। सिस्टम को बदलना ही होगा।
🕯️ नंदनी को विनम्र श्रद्धांजल
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