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वीआईपी आए, पौधे लगाए, तस्वीरें खिंचीं... लेकिन बाराबंकी जिला अस्पताल के मरीज पूछ रहे हैं—इलाज कब सुधरेगा?


तहलका टुडे एक्सक्लूसिव

बाराबंकी। उत्तर प्रदेश सरकार के "पौधारोपण महायज्ञ-2026" एवं "एक पेड़ माँ के नाम" अभियान के तहत रविवार को जिला चिकित्सालय, बाराबंकी में भव्य वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, जिला पंचायत अध्यक्ष राजरानी रावत, एमएलसी अंगद सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष राम सिंह वर्मा "भुल्लन", पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष अरविंद कुमार मौर्य, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की मिशन निदेशक डॉ. पिंकी जोवल, महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. पवन कुमार अरुण, महानिदेशक प्रशिक्षण एवं स्टेट लेप्रोसी ऑफिसर डॉ. रंजना खरे, डॉ. जया देहलवी, जिलाधिकारी ईशान प्रताप सिंह, मुख्य विकास अधिकारी अन्ना सुदन, डीएफओ आकाश दीप बधावन, पुलिस अधीक्षक अर्पित विजयवर्गीय, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रंजन गौतम, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला चिकित्सालय डॉ. जयप्रकाश मौर्य, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला महिला चिकित्सालय डॉ. प्रदीप कुमार, डॉ. डी.के. श्रीवास्तव, डॉ. वी.पी. सिंह, डॉ. एस.पी. यादव, डॉ. ज़मीर, डॉ. राम खिलावन, डॉ. बृजमोहन मौर्य, डॉ. विनोद कुमार, डॉ. मुदित मेहरोत्रा, डॉ. नासिर कमाल, डॉ. निशांत, डॉ. लव गुप्ता, डॉ. एस.बी. सिंह, डॉ. राकेश कुमार, डॉ. दीपक कुमार, डॉ. मनीष यादव, डॉ. सीमा यादव, जिला कार्यक्रम प्रबंधक अंबरीश द्विवेदी, जिला सामुदायिक प्रबंधक सुरेंद्र कुमार, चिकित्सालय प्रबंधक राजकुमार वर्मा सहित जिला चिकित्सालय एवं जिला महिला चिकित्सालय के समस्त चिकित्सक, नर्सिंग अधिकारी, फार्मासिस्ट, पैरामेडिकल स्टाफ एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने "वृक्षों रक्षति रक्षितः" का संदेश देते हुए कहा कि यदि हम वृक्षों की रक्षा करेंगे तो वृक्ष हमारी रक्षा करेंगे। सभी अतिथियों ने "माँ उपवन वाटिका" में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया।

लेकिन अस्पताल के बाहर उठे बड़े सवाल...

कार्यक्रम जितना भव्य था, उसके बाद उतनी ही तेज़ी से स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर चर्चा शुरू हो गई। लोगों का कहना है कि जिला अस्पताल में रोज़ाना हजारों मरीज इलाज के लिए आते हैं, लेकिन भीड़, संसाधनों की कमी और अन्य व्यवस्थागत समस्याओं को लेकर शिकायतें लगातार सामने आती रहती हैं।

जनता का सवाल है कि जिस गंभीरता से वीआईपी कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, क्या उसी गंभीरता से मरीजों की समस्याओं के समाधान पर भी ध्यान दिया जाएगा?

करोड़ों का ट्रॉमा सेंटर, लेकिन जनता अब भी इंतज़ार में

जिला अस्पताल परिसर में करोड़ों रुपये की लागत से बना ट्रॉमा सेंटर बिल्डिंग लंबे समय से चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोगों की अपेक्षा है कि यह पूरी क्षमता से संचालित हो, ताकि गंभीर मरीजों को तत्काल उपचार मिल सके और उन्हें लखनऊ रेफर करने की मजबूरी कम हो।

मेडिकल कॉलेज की मांग पर अब भी खामोशी

बाराबंकी विधानसभा से  विधायक प्रत्याशी एवं वरिष्ठ पत्रकार सैयद रिज़वान मुस्तफा लगातार जिला अस्पताल में बाराबंकी मेडिकल कॉलेज की स्थापना की मांग उठा रहे हैं। उनका कहना है कि जिले की बढ़ती आबादी और मरीजों की संख्या को देखते हुए अब बाराबंकी में सरकारी मेडिकल कॉलेज समय की आवश्यकता बन चुका है। इसके बावजूद इस मांग पर अब तक कोई ठोस प्रगति सामने नहीं आई है।

हर साल पौधारोपण... लेकिन पुराने पौधों का क्या हुआ?

स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि पिछले वर्षों में जिला अस्पताल और अन्य स्थानों पर बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया गया था, लेकिन उनमें से बड़ी संख्या में पौधों का संरक्षण नहीं हो सका। कई लोगों का दावा है कि 75 प्रतिशत से अधिक पौधे अब दिखाई नहीं देते।

यदि ऐसा है, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि इस बार लगाए गए पौधों की निगरानी कौन करेगा? क्या उनकी जियो-टैगिंग होगी? क्या उनके जीवित रहने का वार्षिक ऑडिट होगा? या फिर यह अभियान भी केवल सरकारी रिकॉर्ड और तस्वीरों तक सीमित रह जाएगा?

आवाम का सवाल

पर्यावरण संरक्षण आवश्यक है, वृक्षारोपण भी जरूरी है, लेकिन बाराबंकी की जनता अब यह भी चाहती है कि—

  • जिला अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत हों।
  • ट्रॉमा सेंटर शीघ्र पूरी क्षमता से संचालित हो।
  • बाराबंकी को मेडिकल कॉलेज मिले।
  • और लगाए गए प्रत्येक पौधे के संरक्षण की जवाबदेही भी तय हो।

जनता का संदेश साफ है—हमें केवल पौधे नहीं, बेहतर इलाज भी चाहिए। हरियाली भी चाहिए और जीवन बचाने वाली स्वास्थ्य व्यवस्था भी।

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