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AI के दौर में शिक्षकों को नई उड़ान: एसआरएमयू का छह दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम बना बदलाव की मिसाल,'फ्रॉम चॉकबोर्ड टू चैटबॉट' थीम पर शिक्षकों को मिला एआई, डिजिटल टीचिंग और नवाचार का प्रशिक्षण; राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर जोर


तहलका टुडे ब्यूरो
लखनऊ/बाराबंकी, 11 जुलाई 2026।

शिक्षा का भविष्य अब केवल ब्लैकबोर्ड और किताबों तक सीमित नहीं रहा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव के बीच श्री रामस्वरूप मेमोरियल विश्वविद्यालय (एसआरएमयू) शिक्षकों को आधुनिक तकनीकों से सशक्त बनाने की दिशा में एक नई पहल कर रहा है। विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन एंड रिसर्च (आईईआर) द्वारा आयोजित छह दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (एफडीपी) में देशभर के शिक्षकों को एआई आधारित शिक्षण, डिजिटल नवाचार और आधुनिक शिक्षा पद्धतियों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

"फ्रॉम चॉकबोर्ड टू चैटबॉट: ट्रांसफॉर्मिंग टीचिंग विद एआई" विषय पर आधारित यह कार्यक्रम 6 जुलाई से प्रारंभ हुआ। इसका उद्देश्य शिक्षकों के व्यावसायिक एवं अनुसंधान कौशल को नई तकनीकों के अनुरूप विकसित करना, भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक तकनीक के समन्वय को बढ़ावा देना तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से लागू करना है।

कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) विजय तिवारी ने किया। उन्होंने कहा कि बदलते समय में शिक्षक की भूमिका केवल ज्ञान देने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें तकनीक-सक्षम मार्गदर्शक बनना होगा। उन्होंने प्रतिभागियों से एआई आधारित शिक्षण, शोध एवं नवाचार को अपनाकर शिक्षा को अधिक प्रभावी, रचनात्मक और छात्र-केंद्रित बनाने का आह्वान किया।

आईईआर की प्राचार्या प्रो. (डॉ.) ऋतु चंद्रा ने सभी प्रतिभागियों और विशेषज्ञों का स्वागत करते हुए कहा कि यह कार्यक्रम शिक्षकों को नई शैक्षिक चुनौतियों के लिए तैयार करने का महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने विश्वास जताया कि यहां प्राप्त ज्ञान और अनुभव शिक्षकों के कक्षा-कक्ष में सकारात्मक बदलाव लाएंगे।

एफडीपी के दौरान भारतीय ज्ञान प्रणाली (आईकेएस), डिजिटल टीचिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रिसर्च एंड पब्लिकेशन, आउटकम बेस्ड एजुकेशन (ओबीई), शैक्षिक नेतृत्व और नवाचार आधारित शिक्षण जैसे विषयों पर विशेषज्ञ व्याख्यान, कार्यशालाएं और संवादात्मक सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। इन सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों को आधुनिक शिक्षण तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।

कार्यक्रम के सफल संचालन में डॉ. ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव, डॉ. संदीपा कौर, डॉ. आशीष कुमार अवस्थी, डॉ. रश्मि चतुर्वेदी और डॉ. अपराजिता जायसवाल की महत्वपूर्ण भूमिका रही। आयोजन समिति ने प्रतिभागियों के लिए ऐसा शैक्षिक वातावरण तैयार किया है, जहां वे आधुनिक अनुसंधान पद्धतियों और तकनीकी नवाचारों का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त कर सकें।

विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि यह फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम शिक्षकों की व्यावसायिक दक्षता को नई दिशा देगा और भविष्य में उच्च शिक्षा को अधिक तकनीक-सक्षम, नवाचारी और गुणवत्तापूर्ण बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

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