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विधायक मस्त... पूर्व MLC राजू यादव का जनसमस्याओं को लेकर धरना बना शहर की चर्चा



तहलका टुडे टीम/मनोज शुक्ला

लखनऊ, 25 जुलाई।
शहर की सुबह आज भी रोज़ की तरह हुई। चाय की दुकानों पर बहसें थीं, अख़बारों के पन्ने पलट रहे थे, लेकिन किसानों के खेतों में यूरिया अब भी नहीं थी, छात्रों के मन से नीट परीक्षा का अविश्वास अभी भी नहीं मिटा था, और बिजली का बिल हर महीने घरों में किसी अनचाहे मेहमान की तरह दस्तक दे रहा था।

इन सवालों के बीच राजनीति ने भी अपना रंग दिखाया।

एक ओर  विधायक अपने कार्यक्रमों में मस्त दिखाई दिए, तो दूसरी ओर समाजवादी पार्टी के पूर्व विधान परिषद सदस्य राजेश यादव 'राजू' जनता के मुद्दों को लेकर धरने की तैयारी में जुटे रहे। पहले चर्चा थी कि विधानसभा के सामने सरकार को घेरा जाएगा, मगर जिला प्रशासन की सख्ती ने रास्ता बदलवा दिया। अब वही आवाज़ बाराबंकी गन्ना दफ्तर के परिसर से उठेगी।

राजनीति की दुनिया भी बड़ी अजीब होती है। मंज़िल बदलते ही विरोधियों को तंज़ कसने का नया बहाना मिल गया। किसी ने इसे पीछे हटना कहा, किसी ने रणनीति। मगर आम आदमी के लिए सवाल आज भी वही हैं—खेत में खाद कब पहुँचेगी? छात्रों को निष्पक्ष परीक्षा कब मिलेगी? बिजली के बढ़ते बिलों से राहत कब मिलेगी? और मौलाना मोहम्मद जौहर अली विश्वविद्यालय का भविष्य क्या होगा?

राजू यादव का कहना है कि धरना किसी सड़क या चौराहे का नहीं, बल्कि उन आवाज़ों का है जो सरकारी दफ्तरों की ऊँची दीवारों से टकराकर लौट आती हैं। उनके नेतृत्व में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता यूरिया की कमी, नीट परीक्षा में कथित पेपर लीक, बिजली मीटर और बिलों में कथित धांधली तथा मौलाना मोहम्मद जौहर अली विश्वविद्यालय की सुरक्षा जैसे मुद्दों को लेकर आज दोपहर 12:30 बजे गन्ना दफ्तर में धरना देंगे।

अब देखना यह है कि गन्ना दफ्तर से उठने वाली यह आवाज़ सत्ता के गलियारों तक पहुँचती है या फिर यह भी उन अनगिनत नारों की तरह हवा में खो जाएगी, जिन्हें जनता हर चुनाव के बाद धीरे-धीरे भूलने लगती है।

क्योंकि लोकतंत्र में असली लड़ाई मंचों की नहीं, मुद्दों की होती है; और जनता अंततः उसी की सुनती है, जो उसके दर्द को अपनी आवाज़ बना सके।

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