Hot Posts

6/recent/ticker-posts

"1974 के आंदोलन के सत्याग्रही राजनाथ शर्मा छात्रों के समर्थन में उतरे, बोले— शिक्षा मंत्री का इस्तीफा ले सरकार"

तहलका टुडे टीम/सदाचारी लाला उमेश चंद्र श्रीवास्तव/मोहम्मद वसीक

बाराबंकी, 24 जुलाई। देश में चल रहे छात्र आंदोलन को शुक्रवार को उस समय बड़ा नैतिक समर्थन मिला, जब 1974 के ऐतिहासिक छात्र एवं संपूर्ण क्रांति आंदोलन के सत्याग्रही, गांधीवादी चिंतक राजनाथ शर्मा ने प्रधानमंत्री को खुला पत्र लिखकर छात्रों की मांगों का समर्थन किया और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेने अथवा उन्हें तत्काल पद से बर्खास्त करने की मांग की।

खराब स्वास्थ्य के बावजूद राजनाथ शर्मा देवा रोड स्थित गांधी भवन पहुंचे। उन्होंने महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर छात्र आंदोलन के प्रति अपनी एकजुटता व्यक्त की। स्वास्थ्य कारणों से दिल्ली के जंतर-मंतर नहीं पहुंच पाने पर उन्होंने वहीं से प्रधानमंत्री के नाम पत्र भेजकर कहा कि लोकतंत्र में युवाओं की आवाज को दबाने के बजाय सम्मानपूर्वक सुना जाना चाहिए।

अपने पत्र में श्री शर्मा ने दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए लिखा कि लोकतंत्र की ताकत संवाद में है, दमन में नहीं। सरकार को बल प्रयोग और दमनात्मक कदमों के बजाय छात्रों के साथ सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं का समाधान निकालना चाहिए।

उन्होंने कहा कि आज देश का युवा पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में देरी, बढ़ती बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था की खामियों से निराश और आक्रोशित है। इन मुद्दों को केवल कानून-व्यवस्था का प्रश्न मानना उचित नहीं होगा, बल्कि यह युवाओं के भविष्य और उनके टूटते विश्वास का गंभीर संकेत है।

राजनाथ शर्मा ने अपने पत्र में नीट परीक्षा पेपर लीक का उल्लेख करते हुए कहा कि लाखों विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़े मामलों में लगातार लापरवाही सामने आ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब प्रशासनिक विफलताएं उजागर होती हैं तो जिम्मेदारी तय करने के बजाय दोष दूसरों पर मढ़ दिया जाता है, जबकि सफलताओं का श्रेय सरकार स्वयं लेती है। यह स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपरा नहीं है।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार यदि जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के मामले में संवाद का रास्ता अपना सकती है, तो छात्रों के मामले में भी वही संवेदनशीलता दिखानी चाहिए।

अपने पत्र के अंत में गांधीवादी चिंतक ने प्रधानमंत्री से अपील की कि देश के करोड़ों छात्रों का विश्वास बहाल करने के लिए सरकार नैतिक जिम्मेदारी निभाए और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से तत्काल इस्तीफा ले। यदि ऐसा संभव न हो तो उन्हें पद से बर्खास्त कर निष्पक्ष एवं जवाबदेह व्यवस्था का संदेश दिया जाए।

राजनाथ शर्मा के इस बयान को छात्र आंदोलन के पक्ष में एक महत्वपूर्ण नैतिक हस्तक्षेप माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 1974 के छात्र आंदोलन के एक वरिष्ठ सत्याग्रही का खुलकर सामने आना वर्तमान आंदोलन को नई वैचारिक मजबूती दे सकता है।

Post a Comment

0 Comments