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ज्ञान, कामयाबी और बेटियों की बुलंद परवाज़ का गवाह बना एसआरएमयू का भव्य दीक्षांत समारोह,7,519 छात्रों ने हासिल की डिग्रियां, 405 मेधावियों का हुआ सम्मान, लगातार चार वर्षों के सभी प्रतिष्ठित पदकों पर बेटियों का कब्ज़ाचार साल में दोगुने से ज़्यादा बढ़ा विश्वविद्यालय का परिवार, अब करीब 12 हजार विद्यार्थी कर रहे हैं पढ़ाई


तहलका टुडे | लखनऊ/बाराबंकी | 22 जुलाई 2026

जब मेहनत मुकाम बन जाए, सपने हकीकत में बदल जाएं और माता-पिता की आंखों में खुशी के आंसू छलक उठें, तो वही लम्हा किसी भी विद्यार्थी की ज़िंदगी का सबसे यादगार पल बन जाता है। ऐसा ही ऐतिहासिक और जज़्बाती मंज़र बुधवार को देखने को मिला, जब श्री रामस्वरूप मेमोरियल विश्वविद्यालय (एसआरएमयू) का भव्य दीक्षांत समारोह गोमती नगर स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के मास ऑडिटोरियम में शानदार अंदाज़ में आयोजित हुआ।

पूरा सभागार तालियों की गूंज, खुशी, गर्व और नई उम्मीदों से सराबोर था। मंच से जैसे-जैसे विद्यार्थियों के नाम पुकारे गए, वैसे-वैसे परिवारों के चेहरों पर वर्षों की मेहनत का सुकून साफ़ दिखाई देता रहा। इस अवसर पर कुल 7,519 विद्यार्थियों को विभिन्न संकायों और पाठ्यक्रमों की उपाधियां प्रदान की गईं, जबकि 405 मेधावी विद्यार्थियों को उनकी शानदार शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया। इनमें 232 स्वर्ण पदक, 165 रजत पदक तथा 8 प्रतिष्ठित कुलाधिपति एवं प्रति-कुलाधिपति पदक शामिल रहे।

बेटियों ने फिर साबित किया—मौका मिले तो इतिहास लिख देती हैं

दीक्षांत समारोह का सबसे प्रेरणादायक और गर्व का क्षण वह रहा, जब वर्ष 2021-22 से 2024-25 तक के सभी प्रतिष्ठित कुलाधिपति एवं प्रति-कुलाधिपति पदक केवल छात्राओं ने अपने नाम किए। यह उपलब्धि केवल पुरस्कार नहीं, बल्कि इस बात का संदेश भी है कि आज की बेटियां शिक्षा, नेतृत्व, शोध, नवाचार और हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयां छू रही हैं।

कुलाधिपति पदक से आद्या शर्मा, खुशी बुद्धराज, क्रति जैन और मुस्कान बुद्धराज को सम्मानित किया गया, जबकि प्रति-कुलाधिपति पदक प्रणीता यादव, सौम्या सिंह, श्रेया श्रीवास्तव और राहत परवीन को प्रदान किए गए। इन छात्राओं की सफलता ने पूरे सभागार को तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजा दिया।

एसआरएमयू की तरक्की की रफ़्तार बनी मिसाल

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) विजय तिवारी ने पिछले चार वर्षों की विकास यात्रा प्रस्तुत करते हुए बताया कि वर्ष 2021-22 में विश्वविद्यालय में 4,764 विद्यार्थी थे, जो 2024-25 तक बढ़कर 10,444 हो गए। वर्तमान समय में लगभग 12 हजार विद्यार्थी विभिन्न संकायों और पाठ्यक्रमों में अध्ययन कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि यह केवल संख्या में बढ़ोतरी नहीं, बल्कि समाज के बढ़ते भरोसे और विश्वविद्यालय की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का प्रमाण है। हमारा उद्देश्य केवल विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि उन्हें ऐसा वातावरण देना है, जहां शिक्षा के साथ संस्कार, व्यक्तित्व विकास, शोध, नवाचार और नेतृत्व क्षमता भी विकसित हो।

ज्ञान का असली मकसद समाज और इंसानियत की सेवा है

मुख्य अतिथि प्रो. (डॉ.) भूषण पटवर्धन ने कहा कि दीक्षांत समारोह महज़ डिग्री बांटने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत, अनुशासन और ज्ञान-साधना का उत्सव है। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा को अपनाने, मानसिक गुलामी से बाहर निकलने और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की बात कही। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे अपनी शिक्षा का उपयोग केवल रोज़गार के लिए नहीं, बल्कि समाज और इंसानियत की बेहतरी के लिए भी करें।

सत्य, कर्तव्य और राष्ट्र सेवा का संदेश

समारोह के विशिष्ट अतिथि एवं पूर्व राजदूत अखिलेश मिश्रा ने तैत्तिरीय उपनिषद का उल्लेख करते हुए युवाओं से कहा कि हमेशा सच बोलें, अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करें, निरंतर सीखते रहें और समाज व राष्ट्र की उन्नति में अपना योगदान दें। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल अधिकारों का नाम नहीं, बल्कि जिम्मेदारियों को निभाने का भी नाम है।

कामयाबी के साथ इंसानियत भी ज़रूरी

विश्वविद्यालय के कुलाधिपति इं. पंकज अग्रवाल ने उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि डिग्री जीवन का अंतिम मुकाम नहीं, बल्कि नई जिम्मेदारियों की शुरुआत है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे अपने ज्ञान और हुनर का इस्तेमाल केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित न रखें, बल्कि देश, समाज और मानवता की सेवा के लिए भी आगे आएं।

उन्होंने कहा कि आज के दौर में केवल डिग्री नहीं, बल्कि ईमानदारी, नवाचार, संवेदनशीलता, नेतृत्व क्षमता और लगातार सीखने की आदत ही व्यक्ति को बड़ी कामयाबी दिलाती है। एसआरएमयू ऐसे ही जिम्मेदार, मूल्यनिष्ठ और राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पित युवाओं को तैयार करने के अपने संकल्प पर लगातार आगे बढ़ रहा है।

हर साल बढ़ रही मेधावियों की संख्या

विश्वविद्यालय में शैक्षणिक उत्कृष्टता का स्तर भी लगातार ऊंचा हो रहा है। वर्ष 2021-22 में 52 स्वर्ण और 43 रजत पदक, वर्ष 2022-23 में 55 स्वर्ण और 40 रजत पदक, वर्ष 2023-24 में 61 स्वर्ण और 45 रजत पदक, जबकि वर्ष 2024-25 में 64 स्वर्ण और 37 रजत पदक प्रदान किए गए। यह उपलब्धि विश्वविद्यालय की मजबूत अकादमिक व्यवस्था और विद्यार्थियों की मेहनत का स्पष्ट प्रमाण है।

दीक्षांत समारोह का संचालन परीक्षा नियंत्रक प्रो. (डॉ.) आकांक्षा निगम ने किया। इस अवसर पर प्रति-कुलपति इं. पूजा अग्रवाल, शैक्षणिक सलाहकार आरुषी अग्रवाल, सभी संकायों के डीन, निदेशक, विभागाध्यक्ष, शिक्षक, अभिभावक तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

दीक्षांत समारोह केवल डिग्रियों का वितरण नहीं था, बल्कि यह उन हजारों सपनों की ताबीर का जश्न था, जिनके पीछे वर्षों की मेहनत, माता-पिता की दुआएं, शिक्षकों की रहनुमाई और विद्यार्थियों का अथक संघर्ष शामिल था। एसआरएमयू ने एक बार फिर साबित कर दिया कि शिक्षा केवल रोज़गार का ज़रिया नहीं, बल्कि बेहतर समाज और मजबूत राष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत है।

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