Hot Posts

6/recent/ticker-posts

"संघर्ष की गूंज सत्ता तक पहुँची, लोकतंत्र ने फिर दिखाई अपनी ताकत" — राजनाथ शर्मा

तहलका टुडे डेस्क

बाराबंकी। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद गांधीवादी चिंतक राजनाथ शर्मा ने इसे भारतीय लोकतंत्र की परिपक्वता और जनशक्ति की ऐतिहासिक जीत बताया है। उन्होंने कहा कि जब लोकतंत्र में जनता की आवाज़ ईमानदारी से उठती है, तो उसका असर सत्ता के सर्वोच्च स्तर तक दिखाई देता है।

राजनाथ शर्मा ने कहा कि "संघर्ष कभी व्यर्थ नहीं जाता।" जंतर-मंतर से उठी छात्रों और युवाओं की आवाज़ ने यह साबित कर दिया कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण जनआंदोलन आज भी बदलाव की सबसे बड़ी ताकत हैं। उन्होंने कहा कि किसी मंत्री का इस्तीफा सरकार की कमजोरी नहीं, बल्कि उसकी जवाबदेही और नैतिक उत्तरदायित्व का प्रमाण होता है। इससे पूरे शासन-तंत्र को यह संदेश जाता है कि जनता के प्रति जवाबदेह रहना ही लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे बड़ी शक्ति है।

उन्होंने छात्र-युवाओं के लंबे संघर्ष, परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग और इस आंदोलन से जुड़े सभी युवाओं को बधाई देते हुए पर्यावरणविद् एवं शिक्षाविद् सोनम वांगचुक की भूमिका की भी सराहना की। उनके अनुसार यह जीत केवल छात्रों की नहीं, बल्कि संविधान, लोकतांत्रिक मूल्यों और जनभागीदारी की जीत है।

राजनाथ शर्मा ने याद दिलाया कि उन्होंने छात्र आंदोलन का समर्थन करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की थी। उनका मानना था कि लोकतंत्र में सरकार को जनता की चिंताओं का समाधान दमन से नहीं, बल्कि संवाद और संवेदनशीलता से करना चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्रों की भावनाओं पर विचार करना सरकार का नैतिक दायित्व था और इस दिशा में उठाया गया कदम लोकतांत्रिक परंपराओं को और मजबूत करेगा।

अपने लंबे सार्वजनिक जीवन का उल्लेख करते हुए श्री शर्मा ने कहा कि वे साठ के दशक से छात्र आंदोलनों से जुड़े रहे हैं। उन्होंने नेहरू युग से लेकर विभिन्न सरकारों के दौरान अनेक जनआंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाई, लेकिन इस आंदोलन ने जिस तरह पूरे देश में युवाओं को एकजुट किया और सत्ता को निर्णय लेने पर मजबूर किया, वह लोकतांत्रिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय बन गया।

उन्होंने अंत में कहा, "जब युवा जागता है तो इतिहास बदलता है। यह संघर्ष आने वाली पीढ़ियों को विश्वास दिलाता है कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण जनआंदोलन कभी व्यर्थ नहीं जाते।"

Post a Comment

0 Comments