लखनऊ/बाराबंकी, 19 जून/सदाचारी लाला उमेश चंद्र श्रीवास्तव मोहम्मद
आज जब शिक्षा को अक्सर नौकरी और डिग्री हासिल करने का माध्यम भर समझ लिया जाता है, ऐसे दौर में श्री रामस्वरूप मेमोरियल यूनिवर्सिटी (एसआरएमयू) में आयोजित एक विशेष व्याख्यान ने शिक्षा के वास्तविक उद्देश्य पर गंभीर चर्चा को नई दिशा दी। विश्वविद्यालय के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) की ओर से आयोजित ‘समग्र विकास और शिक्षा की भूमिका’ विषयक विशेषज्ञ व्याख्यान में इस बात पर जोर दिया गया कि शिक्षा का असली मकसद केवल पेशेवर सफलता नहीं, बल्कि बेहतर इंसान और जिम्मेदार नागरिक तैयार करना है।
विश्वविद्यालय के चांसलर इं. पंकज अग्रवाल, प्रो-चांसलर इं. पूजा अग्रवाल और शैक्षणिक सलाहकार आरुषी अग्रवाल के मार्गदर्शन तथा कुलपति प्रो. (डॉ.) विजय तिवारी के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में शिक्षाविदों, विभागाध्यक्षों और शिक्षकों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता ए.पी.जे. अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ के फैकल्टी ऑफ वैल्यू एजुकेशन के एसोसिएट डीन एवं यूपीआईडी नोएडा के डायरेक्टर डॉ. कुमार संभव रहे।
अपने संबोधन में कुलपति प्रो. (डॉ.) विजय तिवारी ने कहा कि तेजी से बदलती दुनिया में केवल तकनीकी दक्षता पर्याप्त नहीं है। युवाओं को आधुनिक ज्ञान के साथ-साथ नैतिक मूल्यों से भी लैस होना होगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य सिर्फ डिग्री देना या रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों का बौद्धिक, शारीरिक, भावनात्मक, नैतिक और आध्यात्मिक विकास सुनिश्चित करना है।
उन्होंने कहा कि सत्य, ईमानदारी, करुणा, अहिंसा और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे मूल्य किसी भी शिक्षित समाज की पहचान होते हैं। यदि शिक्षा इन मूल्यों को विकसित नहीं कर पाती, तो उसका उद्देश्य अधूरा रह जाता है। विश्वविद्यालय का प्रयास है कि यहां से निकलने वाले छात्र केवल सफल प्रोफेशनल ही नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने वाले संवेदनशील नागरिक भी बनें।
मुख्य वक्ता डॉ. कुमार संभव ने अपने व्याख्यान में कहा कि समग्र विकास का अर्थ केवल बौद्धिक उन्नति नहीं है। व्यक्ति के शारीरिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक पक्ष का संतुलित विकास ही उसे पूर्ण मानव बनाता है। उन्होंने कहा कि मूल्यपरक शिक्षा ही युवाओं को जीवन की चुनौतियों का सामना करने और सही निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करती है।
कार्यक्रम में रजिस्ट्रार प्रो. (डॉ.) हेमेंद्र शर्मा ने कहा कि आईक्यूएसी के ऐसे आयोजन विश्वविद्यालय में गुणवत्ता आधारित शिक्षा और नैतिक मूल्यों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
आईक्यूएसी की डायरेक्टर प्रो. (डॉ.) ऋतु चंद्रा ने कहा कि समग्र विकास शिक्षा की आत्मा है। शिक्षा तभी सार्थक मानी जा सकती है जब वह विद्यार्थियों को ज्ञान के साथ-साथ संवेदनशीलता, आत्मनिर्भरता और मानवीय मूल्यों से भी संपन्न बनाए। उन्होंने कहा कि आईक्यूएसी का उद्देश्य ऐसा शैक्षणिक वातावरण तैयार करना है जहां विद्यार्थियों का मानसिक, शारीरिक, भावनात्मक और नैतिक विकास समान रूप से हो सके।
कार्यक्रम में इंस्टीट्यूट ऑफ नेचुरल साइंस एंड ह्यूमैनिटीज़ के डायरेक्टर एवं छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. (डॉ.) बी.एम. दीक्षित, कॉमर्स एवं इकोनॉमिक्स विभाग की अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) वीणा सिंह, परीक्षा नियंता प्रो. (डॉ.) आकांक्षा निगम, प्रो. (डॉ.) अभिषेक सक्सेना सहित विभिन्न संस्थानों के डीन, डायरेक्टर, विभागाध्यक्ष एवं शिक्षक उपस्थित रहे।
आयोजन समिति में प्रो. (डॉ.) वीणा सिंह, डॉ. शिल्पा शुक्ला, डॉ. मृत्युंजय राय तथा अभिषेक कुमार सक्सेना ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम का समापन शिक्षा में मूल्यों की बढ़ती आवश्यकता और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के संकल्प के साथ हुआ।
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