तहलका टुडे डेस्क/सदाचारी लाला उमेश चंद्र श्रीवास्तव
बाराबंकी, 2 जून 2026।
जनपद बाराबंकी की न्यायिक एवं अधिवक्ता बिरादरी ने मंगलवार को उस शख्सियत को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की, जिसने अपने संघर्ष, नेतृत्व, सामाजिक सरोकारों और निर्भीक व्यक्तित्व से न केवल वकालत के क्षेत्र में बल्कि छात्र राजनीति और जनआंदोलनों में भी अमिट छाप छोड़ी। जिला बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष तथा लखनऊ विश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष रहे स्वर्गीय सरदार बेअन्त सिंह की 17वीं पुण्यतिथि पर आयोजित स्मृति दिवस कार्यक्रम जिला बार एसोसिएशन सभागार में गरिमापूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम में न्यायपालिका, अधिवक्ता समुदाय, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिष्ठित हस्तियों ने बड़ी संख्या में उपस्थित होकर स्वर्गीय सरदार बेअन्त सिंह के चित्र पर पुष्प अर्पित किए और उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व को याद किया।
“व्यक्ति नहीं, एक विचारधारा थे सरदार बेअन्त सिंह”
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि जनपद न्यायाधीश श्रीमती प्रतिमा श्रीवास्तव ने अपने संबोधन में कहा कि सरदार बेअन्त सिंह का व्यक्तित्व असाधारण था। उन्होंने कहा कि बाराबंकी में उनके बारे में जितना जानने और सुनने का अवसर मिला, उससे यह स्पष्ट है कि वे केवल एक व्यक्ति नहीं बल्कि एक विचारधारा थे।
उन्होंने कहा कि ऐसे लोग विरले ही जन्म लेते हैं जो अपने जीवनकाल में ही एक संस्था का रूप ले लेते हैं। सरदार बेअन्त सिंह उन्हीं महान व्यक्तित्वों में से एक थे, जिनकी स्मृतियां आज भी लोगों के दिलों में जीवित हैं।
न्यायिक अधिकारियों को भी संकट से निकालने वाले व्यक्तित्व थे दादा
अपर जिला जज प्रथम विनय कुमार सिंह ने अपने छात्र जीवन की स्मृतियों को साझा करते हुए कहा कि लखनऊ विश्वविद्यालय में अध्ययन के दौरान उन्होंने सरदार बेअन्त सिंह के बारे में बहुत कुछ सुना था। बाराबंकी में पहली नियुक्ति के दौरान उन्हें उन्हें निकट से देखने और सुनने का अवसर मिला।
उन्होंने कहा कि दादा बेअन्त सिंह अपनी अद्भुत सूझबूझ, कानूनी ज्ञान और नेतृत्व क्षमता के कारण ऐसे व्यक्तित्व थे जो न केवल अधिवक्ताओं बल्कि कई बार न्यायिक अधिकारियों को भी जटिल परिस्थितियों से बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे।
“युवाओं के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेंगे”
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्रीमती सुधा सिंह ने कहा कि सरदार बेअन्त सिंह का जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि युवा होने का संबंध उम्र से नहीं बल्कि विचारों, ऊर्जा, सपनों और कर्मशीलता से होता है।
उन्होंने कहा कि दादा बेअन्त सिंह ने अपने जीवन से यह साबित किया कि संघर्ष, साहस और सकारात्मक सोच के बल पर समाज में स्थायी पहचान बनाई जा सकती है। उनकी कमी अधिवक्ता समाज हमेशा महसूस करेगा।
संघर्ष, आंदोलन और जनहित की आवाज थे बेअन्त सिंह
जिला बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता मुचकुंद सिंह वर्मा ने कहा कि सरदार बेअन्त सिंह का पूरा जीवन संघर्षों और आंदोलनों से भरा रहा। वे एक सफल अधिवक्ता होने के साथ-साथ जनसमस्याओं के प्रति अत्यंत संवेदनशील और सजग थे।
उन्होंने कहा कि जब भी समाज या अधिवक्ता समुदाय के हितों पर कोई संकट आया, सरदार बेअन्त सिंह ने हमेशा अग्रिम पंक्ति में खड़े होकर नेतृत्व किया और आवश्यक होने पर बड़े से बड़ा आंदोलन करने से भी पीछे नहीं हटे।
हिंदी आंदोलन में संसद तक गूंजी थी उनकी आवाज
पूर्व अध्यक्ष बृजेश दीक्षित एडवोकेट ने कहा कि राष्ट्रभाषा हिंदी के सम्मान के लिए चलाए गए आंदोलन में सरदार बेअन्त सिंह ने संसद तक अपनी आवाज पहुंचाई थी और इस साहसिक कदम के कारण वे राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बने।
उन्होंने कहा कि संघर्षशील व्यक्तित्व और लोकप्रिय नेतृत्व के बल पर उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय छात्रसंघ के महामंत्री और बाद में अध्यक्ष पद को सुशोभित किया तथा बाराबंकी का नाम पूरे प्रदेश में गौरवान्वित किया।
स्मृतियों में जीवंत रहे ‘दादा’
जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रमन लाल द्विवेदी ने विश्वविद्यालय जीवन से जुड़ी अनेक स्मृतियां साझा करते हुए कहा कि सरदार बेअन्त सिंह का व्यक्तित्व बेहद प्रभावशाली और प्रेरणादायक था।
वहीं जिला बार एसोसिएशन के महामंत्री प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि दादा बेअन्त सिंह ने अनेक रचनात्मक और जनहितकारी कार्य किए तथा युवा अधिवक्ताओं को सदैव संरक्षण और मार्गदर्शन प्रदान किया।
श्रद्धांजलि सभा में उमड़ी बड़ी संख्या
अधिवक्ता हुमायूँ नईम खान के कुशल संचालन में आयोजित कार्यक्रम में वरिष्ठ उपाध्यक्ष दिलीप कुमार गुप्ता, पूर्व अध्यक्ष सुरेन्द्र प्रताप सिंह, बब्बन सिंह, हरीश अग्निहोत्री, हिसाल बारी किदवई, नरेन्द्र वर्मा, कौशल किशोर त्रिपाठी, नरेश कुमार सिंह, देवेन्द्र प्रताप यादव, रितेश मिश्रा, शाहीन अख्तर, अशोक कुमार वर्मा, रामराज यादव, सरदार अवतार सिंह, सरदार नरेन्द्र सिंह सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रबुद्ध नागरिकों ने भाग लिया।
इसके अतिरिक्त लखनऊ से आए पारिवारिक न्यायालय के पूर्व महामंत्री जगजीत सिंह ने भी माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किए।
पुत्रों ने जताया आभार
कार्यक्रम के अंत में स्वर्गीय सरदार बेअन्त सिंह के पुत्र सरदार आलोक सिंह एवं सरदार राजा सिंह एडवोकेट ने उपस्थित सभी न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और अतिथियों का आभार व्यक्त किया।
दादा बेअन्त सिंह की विरासत आज भी जीवित है
श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं के विचारों से एक बात स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आई कि सरदार बेअन्त सिंह केवल एक सफल अधिवक्ता या छात्र नेता नहीं थे, बल्कि वे संघर्ष, न्याय, नेतृत्व और जनसेवा की उस परंपरा के प्रतीक थे, जो आने वाली पीढ़ियों को लगातार प्रेरित करती रहेगी। उनकी स्मृतियां और विचार आज भी बाराबंकी की सामाजिक, न्यायिक और जनआंदोलन की चेतना में जीवंत हैं।
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