तहलका टुडे टीम
बाराबंकी। गांधी जयंती सप्ताह के तीसरे दिन गांधी भवन से निकली दो तस्वीरों ने सबका ध्यान खींचा—एक ओर नन्हे कदम कौमी एकता और भाईचारे का संदेश लेकर दौड़ रहे थे, तो दूसरी ओर नन्हे हाथ कागज पर गांधी के व्यक्तित्व और विचारों को रंग दे रहे थे।
मैराथन में दौड़ा भाईचारे का संदेश
छाया चौराहे से गांधी भवन तक आयोजित गांधी मैराथन में महात्मा गांधी स्पोर्ट्स क्लब के करीब 40 बच्चों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। नागपुर से आए सामाजिक कार्यकर्ता अनिल चौहान ने मैराथन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
बच्चों ने दौड़ पूरी करने के बाद गांधी जी के सत्य, अहिंसा और भाईचारे के संदेश को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
सीनियर वर्ग में दीपक प्रथम, आदित्य कश्यप द्वितीय और मो. समद तृतीय रहे। जूनियर वर्ग में आर्यन प्रथम, राज द्वितीय और शिवा तृतीय स्थान पर रहे। सब-जूनियर वर्ग में प्रीतम प्रथम, अंजर द्वितीय और तन्हा तृतीय रहे।
छह वर्षीय नैतिक ने भी पूरे उत्साह से दौड़ में हिस्सा लिया। उसके उत्साह को देखते हुए आयोजकों ने उसे स्पेशल प्राइज देकर सम्मानित किया।
सह-संयोजक सलाउद्दीन किदवई ने कहा कि मैराथन का उद्देश्य बच्चों में खेल भावना के साथ कौमी एकता, भाईचारे और सामाजिक सौहार्द की भावना को मजबूत करना है।
कागज पर उतर आया गांधी का जीवन-दर्शन
इसी क्रम में गांधी भवन में आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता में विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों ने अपनी कल्पना को रंगों के माध्यम से अभिव्यक्त किया।
ऑक्सफोर्ड इंटरनेशनल स्कूल, देवा, साईं इंटर कॉलेज लखपेड़ाबाग, पायनियर मान्टेसरी हाईस्कूल, जमील-उर-रहमान किदवई इस्लामिया गर्ल्स इंटर कॉलेज, सिटी इंटरमीडिएट कॉलेज, पीएम श्री राजकीय इंटर कॉलेज और आनंद भवन स्कूल के विद्यार्थियों ने प्रतियोगिता में भाग लिया।
किसी बच्चे ने गांधी जी को चरखा चलाते हुए उकेरा, तो किसी ने सत्य और अहिंसा को रंगों में ढाला। स्वच्छता, स्वदेशी, सामाजिक सद्भाव और गांधी के जीवन-दर्शन से जुड़े चित्रों ने गांधी भवन में मौजूद लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
आयोजक विनय कुमार सिंह ने बताया कि प्रतियोगिता का उद्देश्य बच्चों को गांधी जी के विचारों से जोड़ने के साथ उनकी रचनात्मक प्रतिभा को मंच देना है। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को गांधी जयंती सप्ताह के समापन अवसर पर सम्मानित किया जाएगा।
इस तरह गांधी भवन में आयोजित कार्यक्रमों ने साहित्य, सम्मान, खेल और कला—चारों माध्यमों से एक ही संदेश सामने रखा कि बच्चों के मन में अगर सत्य, अहिंसा, भाईचारा और इंसानियत के बीज बो दिए जाएं, तो समाज का भविष्य बेहतर बनाया जा सकता है।
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