तहलका टुडे टीम/सदाचारी लाला उमेश चंद्र श्रीवास्तव/मोहम्मद वसीक
बाराबंकी:आँख…जिससे इंसान दुनिया को देखता है,
अपने बच्चों का चेहरा पहचानता है,
सूरज की पहली किरण और दीये की आख़िरी लौ को महसूस करता है।
लेकिन जब आँखों पर मोतियाबिंद की धुंध छा जाती है, तो यह दुनिया धीरे-धीरे अंधेरे में बदलने लगती है।
मोतियाबिंद कोई साधारण बीमारी नहीं—
यह रोज़मर्रा की ज़िंदगी छीन लेती है।
चलते समय लड़खड़ाना,
खाना बनाते वक्त हाथ जल जाना,
किसी का चेहरा पहचान न पाना,
और सबसे दर्दनाक—
दूसरों पर बोझ बन जाने का एहसास।
इसी अंधेरे को चीरने की कोशिश आज अयोध्या मंडल के श्रीराम वन कुटीर आश्रम, हढ़ियाकोल में दिखाई दी, जहाँ 46वें निःशुल्क नेत्र (मोतियाबिंद) ऑपरेशन शिविर की शुरुआत के साथ सैकड़ों ज़िंदगियों में उम्मीद की लौ जली।
प्रदेश के दूर-दराज़ इलाकों से आए बुज़ुर्ग, महिलाएँ और गरीब मज़दूर—जिनकी आँखों में धुंध थी लेकिन दिलों में भरोसा—
आज ओपीडी के बाद इलाज की प्रक्रिया में शामिल हुए।
यह केवल चिकित्सा नहीं, सम्मान के साथ देखने का हक़ लौटाने का प्रयास है।
दिनांक 28, प्रातः 08 बजे, श्रीराम वन कुटीर ट्रस्ट समिति के अध्यक्ष भगवानदास जी महाराज शिविर के संरक्षक रोगहरण श्री हनुमान जी महाराज की विधिवत पूजा-पाठ कर इस सेवा यज्ञ का शुभारंभ करेंगे।
यह पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि उन आँखों के लिए दुआ है जो फिर से रोशनी तलाश रही हैं।
सभी ऑपरेशन स्वामी रामदास जी महाराज स्मृति चिकित्सालय (धर्मार्थ) के अत्याधुनिक ऑपरेशन थियेटर में किए जाएंगे—जहाँ आधुनिक तकनीक के साथ मानवीय संवेदना बराबर मौजूद है।
इस शिविर के पीछे महीनों की तपस्या छिपी है।
अंकित गुप्ता (गोरखपुर) की टीम ने दिन-रात मेहनत कर सारी व्यवस्थाएँ पूरी कीं।
मरीजों के परिजनों की चिंता को समझते हुए, आश्रम की रियायती कैन्टीन निखिल खुराना (दिल्ली) की देखरेख में शुरू की गई—क्योंकि बीमारी केवल मरीज की नहीं, पूरे परिवार की परीक्षा होती है।
कड़ाके की ठंड में आँखों की रौशनी के साथ जिंदगी की गरमी भी बाँटी गई।
रामकृष्ण मिशन सेवा आश्रम के सचिव स्वामी मुक्ति नाथानन्द जी महाराज के निर्देश पर स्वामी विश्वदेवानन्द जी एवं स्वामी रामाधीशानन्द जी महाराज ने सैकड़ों जरूरतमंदों को कंबल वितरित किए।
यह वितरण स्वामी रामज्ञानदास जी महाराज निःशुल्क ओपीडी सेंटर में स्थापित स्वामी विवेकानन्द जी की प्रतिमा के समक्ष हुआ—जहाँ विचार और करुणा एक साथ खड़े दिखाई दिए।
प्रशासनिक सहयोग ने इस सेवा को और मजबूती दी।
शशांक त्रिपाठी, जिलाधिकारी बाराबंकी के निर्देश पर नगर पंचायत बंकी द्वारा सफाई और अलाव की समुचित व्यवस्था की गई।
वहीं अर्पित विजयवर्गीय, पुलिस अधीक्षक बाराबंकी के निर्देश पर दुर्गा शुक्ला, प्रभारी निरीक्षक जहाँगीराबाद ने शिविर स्थल पर पहुँचकर सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अवधेश यादव के निर्देश पर डॉ. डी.के. श्रीवास्तव (जिला कार्यक्रम अधिकारी—नेत्र) एवं टी.एन. वर्मा (वरिष्ठ नेत्र परीक्षण अधिकारी) ने ऑपरेशन थियेटर और वार्ड का निरीक्षण कर संतोष व्यक्त किया।
यह शिविर सिर्फ आँखों की बीमारी नहीं मिटा रहा—
यह उस डर को खत्म कर रहा है
जो अंधेरे के साथ इंसान के भीतर घर कर जाता है।
जब किसी बुज़ुर्ग की आँखों से पट्टी हटेगी
और वह फिर से अपने नाती का चेहरा देख पाएगा—
तब समझ आएगा कि
आँख की रौशनी लौटना, ज़िंदगी लौटने जैसा होता है।
यही कारण है कि
ऐसे शिविर समाज को ताक़त देते हैं,
हौसला देते हैं
और इंसानियत को ज़िंदा रखते हैं।
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