बाराबंकी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार की महत्वपूर्ण स्वास्थ्य पहल प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) का उद्देश्य देश की हर गर्भवती महिला तक गुणवत्तापूर्ण प्रसव-पूर्व स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है। प्रत्येक माह की 9 तारीख को आयोजित होने वाले इस अभियान के तहत गर्भवती महिलाओं की जांच, संभावित जटिलताओं की पहचान और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ चिकित्सा केंद्र तक रेफरल सुनिश्चित किया जाता है।
बाराबंकी में 9 सितंबर 2026 को आयोजित PMSMA अभियान के आंकड़े उत्साहजनक तस्वीर पेश करते हैं। उपलब्ध अभियान रिपोर्ट के अनुसार 730 गर्भवती महिलाओं की जांच की गई। इनमें 270 महिलाओं को हाई रिस्क प्रेग्नेंसी (HRP) के रूप में चिन्हित किया गया, जबकि 14 महिलाओं को आगे के उपचार के लिए रेफर किया गया।
730 महिलाओं की जांच, किसी को जांच से वंचित नहीं किया गया
अभियान की रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि स्वास्थ्य सेवाओं के लिए पहुंचीं 730 गर्भवती महिलाओं की जांच दर्ज की गई। प्रसव पूर्व जांच के माध्यम से महिलाओं की स्वास्थ्य स्थिति का आकलन किया गया और संभावित जोखिमों को पहचानने का प्रयास किया गया।
PMSMA के आधिकारिक दिशा-निर्देशों में भी हाई रिस्क गर्भावस्था की पहचान और उसके फॉलोअप को अभियान का महत्वपूर्ण घटक बताया गया है।
270 हाई रिस्क गर्भावस्थाओं की पहचान
अभियान के दौरान 270 महिलाओं में हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की पहचान विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। किसी गर्भवती महिला में जोखिम की पहचान जितनी जल्दी होती है, उतनी ही जल्दी उसके लिए चिकित्सकीय निगरानी और सुरक्षित प्रसव की योजना बनाई जा सकती है।
यही PMSMA की सबसे बड़ी उपयोगिता है—समस्या गंभीर होने का इंतजार नहीं, बल्कि खतरे के संकेतों को पहले ही पहचानना।
14 महिलाओं को समय रहते रेफरल
रिपोर्ट के अनुसार 14 गर्भवती महिलाओं को आगे की चिकित्सा सुविधा के लिए रेफर किया गया। इससे यह संकेत मिलता है कि जांच के दौरान जिन महिलाओं को उच्च स्तर की चिकित्सा देखभाल की जरूरत महसूस हुई, उन्हें आगे की सुविधा तक पहुंचाने की प्रक्रिया अपनाई गई।
अब इन महिलाओं के साथ-साथ चिन्हित 270 HRP मामलों का नियमित फॉलोअप इस अभियान की अगली महत्वपूर्ण कड़ी है।
सीएमओ डॉ. रंजन गौतम की निगरानी में मातृ स्वास्थ्य पर जोर
बाराबंकी के मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. रंजन गौतम के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग द्वारा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था में CMO कार्यालय की भूमिका महत्वपूर्ण है और जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर CMO के लिए 8005192641 का वर्तमान संपर्क नंबर भी दर्ज है।
सरकारी स्वास्थ्य तंत्र के स्तर पर 9 सितंबर की रिपोर्ट यह बताती है कि PMSMA को केवल औपचारिक आयोजन के रूप में नहीं, बल्कि गर्भवती महिलाओं की स्क्रीनिंग और जोखिम की पहचान के माध्यम के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
बाराबंकी का बड़ा स्वास्थ्य नेटवर्क
जिले में 3 जिला अस्पताल, 20 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) और 60 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) का नेटवर्क बताया गया है। इतनी बड़ी स्वास्थ्य संरचना के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं तक प्रसव पूर्व सेवाएं पहुंचाने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग पर है।
हर महीने की 9 तारीख का PMSMA दिवस इस नेटवर्क को मातृ स्वास्थ्य के एक साझा अभियान में जोड़ता है।
सरकार की योजना का असली लक्ष्य—सुरक्षित मां, स्वस्थ बच्चा
PMSMA का उद्देश्य केवल गर्भवती महिला की एक बार जांच करना नहीं है। आधिकारिक योजना के अनुसार दूसरी और तीसरी तिमाही की गर्भवती महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण प्रसव पूर्व देखभाल, आवश्यक जांच एवं दवाएं उपलब्ध कराने के साथ हाई रिस्क गर्भावस्था की पहचान और फॉलोअप पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
बाराबंकी में 9 सितंबर के आंकड़े इसी दिशा में एक सकारात्मक तस्वीर पेश करते हैं—
730 गर्भवती महिलाओं की जांच।
270 हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की पहचान।
14 महिलाओं का रेफरल।
अब इन चिन्हित महिलाओं का समयबद्ध फॉलोअप और सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करना अभियान की सफलता को और मजबूत करेगा।
सीएमओ की पहल को मिली सकारात्मक दिशा
मातृ स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषय में सबसे महत्वपूर्ण बात है कि गर्भवती महिला को समय पर जांच, समय पर जोखिम की पहचान और समय पर चिकित्सा सुविधा मिले। बाराबंकी के 9 सितंबर के आंकड़े बताते हैं कि इस दिशा में स्वास्थ्य विभाग सक्रिय रूप से काम कर रहा है।
प्रधानमंत्री की योजना का उद्देश्य तभी पूरा होता है जब सरकारी व्यवस्था आंकड़ों से आगे बढ़कर वास्तविक जीवन में मां और बच्चे की सुरक्षा सुनिश्चित करे। बाराबंकी में 730 महिलाओं की जांच और 270 हाई रिस्क मामलों की पहचान इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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