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साझी तहज़ीब ही हिंदुस्तान की असली ताक़त: अरविन्द सिंह गोप,गंगा-जमुनी तहज़ीब और साझा विरासत को बचाने का संकल्प, गांधी भवन में जुटीं शहर की जानी-मानी शख्सियतें


मोहम्मद वसीक

बाराबंकी। हिंदुस्तान सिर्फ़ अलग-अलग मज़हबों, ज़बानों और रिवायतों का मुल्क नहीं, बल्कि सदियों से साथ जीने, एक-दूसरे की इज़्ज़त करने और मुश्किल वक्त में एक-दूसरे के साथ खड़े रहने की पहचान भी है। इसी खूबसूरत रवायत को आगे बढ़ाने के मक़सद से रविवार को गांधी भवन में ‘साझा संस्कृति–साझा विरासत’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें सियासी, समाजी, सांस्कृतिक और अदबी हल्कों की कई जानी-मानी शख्सियतें एक मंच पर जमा हुईं।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि भारत की असली ताक़त उसकी गंगा-जमुनी तहज़ीब, आपसी मोहब्बत, भाईचारे, सब्र और बर्दाश्त में है। यह विरासत किसी एक मज़हब या तबके की नहीं, बल्कि पूरे हिंदुस्तान की साझा दौलत है। इसे आने वाली नस्लों तक पहुंचाना हम सबकी जिम्मेदारी है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री अरविन्द कुमार सिंह गोप ने कहा कि हिंदुस्तान की पहचान उसकी साझी संस्कृति और आपसी भाईचारे से है। उन्होंने कहा कि आज समाज में अगर कहीं फासले बढ़ रहे हैं तो उन्हें नफ़रत से नहीं, बल्कि बातचीत, मोहब्बत और आपसी भरोसे से कम किया जा सकता है।

उन्होंने नौजवानों से मुख़ातिब होते हुए कहा कि नई नस्ल को अपनी उस विरासत को समझना होगा, जिसमें मंदिर की घंटी और मस्जिद की अज़ान के बीच इंसानियत की आवाज़ सुनाई देती है। उन्होंने कहा कि यही हिंदुस्तान की खूबसूरती है और इसी खूबसूरती को बचाना वक्त की सबसे बड़ी ज़रूरत है।

कार्यक्रम की सदारत करते हुए देवा शरीफ वेलफेयर ट्रस्ट के अध्यक्ष हाजी वासिक वारसी ने कहा कि बाराबंकी की सरज़मीन हमेशा से मोहब्बत और भाईचारे का पैग़ाम देती आई है। देवा शरीफ और महादेवा की रिवायतें इस बात की गवाह हैं कि यहां लोगों ने मज़हब से ऊपर उठकर इंसानियत को अहमियत दी है।

उन्होंने कहा कि धार्मिक और समाजी हम-आहंगी किसी भी मजबूत समाज की बुनियाद है। अगर दिलों में एक-दूसरे के लिए इज़्ज़त और मोहब्बत कायम रहे तो कोई ताक़त समाज को बांट नहीं सकती।

गांधी जयंती समारोह ट्रस्ट के संस्थापक एवं वरिष्ठ गांधीवादी चिंतक राजनाथ शर्मा ने कहा कि महात्मा गांधी का सपना ऐसा हिंदुस्तान था, जहां हर मज़हब, हर जाति और हर तबके के इंसान को बराबरी का सम्मान और अधिकार मिले। उन्होंने कहा कि आज जब समाज में दूरियां बढ़ाने की कोशिशें दिखाई देती हैं, ऐसे दौर में गांधी के विचार और भी ज्यादा मौजू हो जाते हैं।

वरिष्ठ कांग्रेसी नेता अमीर हैदर और मशहूर शायर अंजुम बाराबंकवी ने कहा कि मुल्क की तरक़्क़ी सिर्फ़ सड़कों और इमारतों से नहीं, बल्कि दिलों को जोड़ने से होती है। समाज में अमन, भाईचारा और आपसी एहतराम कायम रखने के लिए ऐसे कार्यक्रम लगातार होते रहने चाहिए।

कार्यक्रम में गांधीवादी सोच, राष्ट्रीय एकता, समाजी हम-आहंगी और साझा सांस्कृतिक विरासत जैसे अहम मुद्दों पर खुलकर बातचीत हुई। मौजूद लोगों ने इस बात का अहद किया कि मोहब्बत, भाईचारे, सद्भाव और इंसानी रिश्तों की इस खूबसूरत रवायत को कमजोर नहीं पड़ने दिया जाएगा।

कार्यक्रम के दौरान पत्रकार पाटेश्वरी प्रसाद को जन्मदिन की मुबारकबाद देते हुए शॉल पेश कर सम्मानित किया गया। वहीं हाजी वारिस अली शाह मज़ार ट्रस्ट के नामित ट्रस्टी बनने पर वकास वारसी का इस्तक़बाल किया गया।

इस मौके पर जिला बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष बृजेश दीक्षित, कौशल किशोर त्रिपाठी एडवोकेट, हुमायूं नईम खान, विजय कुमार सिंह ‘मुन्ना’, पूर्व विधायक सरवर अली खान, पूर्व विधायक रामगोपाल रावत, वरिष्ठ सपा नेता प्रमोद बाजपेयी, सभासद शिवा शर्मा, उमेर किदवई, फजल इनाम मदनी, अक्षत शुक्ला, मृत्युंजय शर्मा, सत्यवान वर्मा, शिवशंकर शुक्ला, अख्तर सिद्दीकी, अनवर महबूब किदवई, नय्यर जमाल किदवई, उबेद उल्ला किदवई, फरहत उल्ला किदवई, शऊर कामिल किदवई, पूर्व आईपीएस मोहम्मद अली साहिल, उमेश श्रीवास्तव, अशोक शुक्ला, अजय वर्मा ‘अज्जी’, ताज बाबा राइन, कासिम सभासद, कय्यूम प्रधान, अब्दुल रहमान लल्लू, हशमत अली गुड्डू, विनय कुमार सिंह और फारूख अयूब एडवोकेट समेत बड़ी तादाद में गणमान्य लोग मौजूद रहे।

संदेश साफ़ था—दिल जुड़ेंगे तो हिंदुस्तान मजबूत होगा

गांधी भवन में हुए इस कार्यक्रम का सबसे खूबसूरत पैग़ाम यही रहा कि विरासत सिर्फ़ किताबों में पढ़ने की चीज़ नहीं, बल्कि उसे अपनी ज़िंदगी में उतारने का नाम है। बाराबंकी की गंगा-जमुनी तहज़ीब इसी साझा विरासत की ज़िंदा तस्वीर है, जिसे मोहब्बत और भाईचारे के साथ अगली नस्ल तक पहुंचाना ही असली ज़िम्मेदारी है।

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