सदाचारी लाला उमेश चंद्र श्रीवास्तव,मोहम्मद वसीक
बाराबंकी में जघन्य अपराधों के खिलाफ चलाए जा रहे “ऑपरेशन कन्विक्शन” के तहत अभियोजन की प्रभावी पैरवी का एक और मजबूत परिणाम सामने आया है। वर्ष 2018 के बहुचर्चित हत्या के मुकदमे में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, कोर्ट संख्या-04, बाराबंकी ने तीन अभियुक्तों को दोषसिद्ध करते हुए आजीवन कारावास और प्रत्येक को ₹25,000 के अर्थदंड से दंडित किया।
इस पूरे मामले में एडीजीसी कोर्ट संख्या-04 मथुरा प्रसाद वर्मा की प्रभावी अभियोजन पैरवी महत्वपूर्ण रही। अभियोजन की ओर से मुकदमे के तथ्यों, उपलब्ध साक्ष्यों और महत्वपूर्ण गवाहों को न्यायालय के समक्ष मजबूती से प्रस्तुत किया गया, जिसके बाद अदालत ने तीनों अभियुक्तों को दोषी मानते हुए कठोर सजा सुनाई।
आठ साल पुराने हत्या के मुकदमे में आया फैसला
मामला थाना मोहम्मदपुर खाला क्षेत्र के ग्राम पारा का है। पुलिस के अनुसार 18 अप्रैल 2018 को दिनेश कुमार पुत्र गोड़ई निवासी पारा ने अपने भाई की हत्या किए जाने के संबंध में थाना मोहम्मदपुर खाला में तहरीर दी थी।
तहरीर के आधार पर पुलिस ने मु0अ0सं0-145/2018, धारा 302 भादवि के तहत मुकदमा दर्ज किया।
मुकदमे में पारा निवासी—
1. रामू पुत्र सकटू
2. गोविन्द पुत्र सकटू
3. अनूप पुत्र सकटू
को अभियुक्त बनाया गया था।
वैज्ञानिक विवेचना से तैयार हुआ अभियोजन का आधार
पुलिस के मुताबिक तत्कालीन विवेचक निरीक्षक राजेश कुमार ने मामले की विवेचना पूरी करते हुए साक्ष्यों का संकलन किया और वैज्ञानिक विधि से जांच के बाद अभियुक्तों के विरुद्ध न्यायालय में आरोपपत्र प्रेषित किया।
इसके बाद मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने मामले को प्रभावी ढंग से न्यायालय के समक्ष रखा।
एडीजीसी मथुरा प्रसाद वर्मा की पैरवी पर टिकी अभियोजन की मजबूती
इस मामले में एडीजीसी मथुरा प्रसाद वर्मा की भूमिका विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। कोर्ट संख्या-04 में अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी करते हुए उन्होंने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर मुकदमे को मजबूती से आगे बढ़ाया।
पुलिस मॉनीटरिंग सेल के सहयोग से महत्वपूर्ण गवाहों की न्यायालय में उपस्थिति सुनिश्चित कराने और मुकदमे की लगातार मॉनीटरिंग के साथ अभियोजन पक्ष ने अपना पक्ष प्रभावी ढंग से रखा।
अभियोजन की इस पैरवी का परिणाम यह रहा कि अदालत ने तीनों अभियुक्तों को हत्या के अपराध में दोषसिद्ध करते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
तीनों अभियुक्तों पर ₹25-₹25 हजार का जुर्माना
अदालत ने रामू, गोविन्द और अनूप को आजीवन कारावास के साथ-साथ प्रत्येक पर ₹25,000 का अर्थदंड भी लगाया।
इस तरह अदालत के फैसले के बाद हत्या के इस मामले में तीनों अभियुक्तों को कठोर दंड मिला है।
‘ऑपरेशन कन्विक्शन’ में पुलिस-अभियोजन का तालमेल
पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश लखनऊ के निर्देशों के क्रम में पुलिस अधीक्षक बाराबंकी अर्पित विजयवर्गीय के निर्देशन में जघन्य अपराधों में दोषियों को सजा दिलाने के लिए “ऑपरेशन कन्विक्शन” के तहत मुकदमों की लगातार मॉनीटरिंग की जा रही है।
इस व्यवस्था में विवेचना, साक्ष्य संकलन, महत्वपूर्ण गवाहों की प्रस्तुति और अभियोजन पैरवी के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया जा रहा है।
इसी क्रम में इस मुकदमे में भी एडीजीसी मथुरा प्रसाद वर्मा की अभियोजन पैरवी, मॉनीटरिंग सेल की निगरानी और पुलिस पैरोकार की सक्रिय भूमिका के चलते अदालत से दोषसिद्धि और आजीवन कारावास की सजा हासिल हुई।
पुलिस/अभियोजन टीम की महत्वपूर्ण भूमिका
इस मामले में निम्न अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका रही—
- मथुरा प्रसाद वर्मा, एडीजीसी, कोर्ट संख्या-04, बाराबंकी
- निरीक्षक विनोद कुमार यादव, प्रभारी मॉनीटरिंग सेल
- उपनिरीक्षक अमर बहादुर सिंह, मॉनीटरिंग सेल
- महिला हेड कांस्टेबल प्रतिमा द्विवेदी, मॉनीटरिंग सेल
- महिला कांस्टेबल अंशू द्विवेदी, मॉनीटरिंग सेल
- हेड कांस्टेबल विजय बहादुर तिवारी, मॉनीटरिंग सेल
- हेड कांस्टेबल चन्द्रशेखर, मॉनीटरिंग सेल
- कांस्टेबल बृजेश कुमार, मॉनीटरिंग सेल
- कांस्टेबल नीरज कनौजिया, मॉनीटरिंग सेल
- कांस्टेबल धीरेन्द्र कुमार, पैरोकार थाना फतेहपुर
- हेड कांस्टेबल रामकुमार, कोर्ट मोहर्रिर, कोर्ट संख्या-04
फैसले से जनता में न्याय के प्रति विश्वास मजबूत
बाराबंकी पुलिस के अनुसार जघन्य अपराधों में प्रभावी पैरवी के परिणामस्वरूप दोषियों को कठोर सजा दिलाए जाने से जनता में कानून और न्याय व्यवस्था के प्रति विश्वास मजबूत होता है।
वर्ष 2018 के इस हत्या के मुकदमे में तीन अभियुक्तों को आजीवन कारावास और ₹25-₹25 हजार के अर्थदंड की सजा इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
रिपोर्ट: कानून के शिकंजे में हत्या के दोषी—अभियोजन की मजबूत पैरवी से तीनों को उम्रकैद।
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