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जब सोच को मिली आवाज़ और हुनर को मिला मंच, ‘अभिव्यक्ति’ में छात्रों ने बटोरी तालियांश्री रामस्वरूप मेमोरियल विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज़ में दो दिवसीय आयोजन—निबंध, कहानी, भाषण, वाद-विवाद और मीम प्रतियोगिताओं में छात्रों ने दिखाया दम


तहलका टुडे टीम/सदाचारी लाला उमेश चंद्र श्रीवास्तव/मोहम्मद वसीक 

बाराबंकी।हर छात्र अपने साथ कोई न कोई हुनर लेकर चलता है। किसी के पास अच्छी बात कहने का अंदाज़ होता है, किसी की कलम बहुत कुछ कह जाती है और कोई बिना ज्यादा शब्दों के भी अपनी बात लोगों तक पहुंचा देता है। जरूरत सिर्फ एक ऐसे मौके की होती है, जहां झिझक पीछे छूट जाए और प्रतिभा सामने आ सके।

राष्ट्रीय हिंदी दिवस के अवसर पर श्री रामस्वरूप मेमोरियल विश्वविद्यालय, लखनऊ-देवा रोड, बाराबंकी के इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज़ में आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम ‘अभिव्यक्ति’ कुछ ऐसा ही मंच बनकर सामने आया। 14 और 15 सितंबर 2026 को आयोजित इस कार्यक्रम में छात्रों ने अपनी सोच, लेखन, बोलने की कला और रचनात्मकता के अलग-अलग रंग दिखाए।

कहीं मंच पर तर्कों की गर्मी थी, कहीं भाषण में आत्मविश्वास नजर आया, कहीं कहानी के जरिए कल्पना की दुनिया सामने आई और कहीं मीम के जरिए गंभीर बात को आसान और दिलचस्प अंदाज़ में पेश किया गया।

कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को पढ़ाई के साथ-साथ रचनात्मक सोच, तर्क क्षमता, लेखन कौशल, संवाद क्षमता और आत्मविश्वास विकसित करने का अवसर देना था।

यह आयोजन विश्वविद्यालय के चांसलर इंजी. पंकज अग्रवाल, प्रो-चांसलर इंजी. पूजा अग्रवाल, कुलपति प्रो. (डॉ.) विजय तिवारी और कुलसचिव डॉ. हेमेंद्र शर्मा के मार्गदर्शन में हुआ। इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज़ के निदेशक प्रो. (डॉ.) नरेंद्र बहादुर सिंह के निर्देशन में कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

वेद प्रकाश ने कहा—प्रतिभा को पहचानना भी शिक्षा का हिस्सा

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री वेद प्रकाश, अपर आयुक्त, उत्तर प्रदेश वाणिज्य कर (सेवानिवृत्त) रहे।

उन्होंने छात्रों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षा केवल परीक्षा पास करने का माध्यम नहीं है। छात्रों में अपनी बात प्रभावी ढंग से रखने, सही तर्क करने, रचनात्मक सोच विकसित करने और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की क्षमता भी होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा पहचानने और अपने विचार खुलकर सामने रखने का अवसर देते हैं। उन्होंने छात्रों को रचनात्मक और स्वतंत्र सोच के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

दो प्रतियोगिताओं में मंतशा खान का पहला स्थान

निबंध लेखन में बी.ए. एलएल.बी., नवम सेमेस्टर की मंतशा खान ने पहला स्थान हासिल किया। आयुषी यादव दूसरे, रुचिता मौर्या तीसरे और सुमन सहानी चौथे स्थान पर रहीं।

कहानी लेखन में भी मंतशा खान ने बाज़ी मारी और प्रथम स्थान हासिल किया। आयुष अग्रवाल दूसरे, सिमरन गुप्ता तीसरे और वर्तिका पांडेय चौथे स्थान पर रहीं।

दो प्रतियोगिताओं में प्रथम स्थान हासिल करना मंतशा खान की लेखन क्षमता और रचनात्मक सोच का खास उदाहरण रहा।

मीम प्रतियोगिता में रिद्धिमा सिंह अव्वल

आज की डिजिटल दुनिया में अपनी बात कहने के नए तरीकों को सामने लाने के लिए आयोजित मीम-निर्माण प्रतियोगिता में रिद्धिमा सिंह ने पहला स्थान हासिल किया।

वैभव सिंह दूसरे, आदित्य मल्ल तीसरे और सुहानी त्यागी चौथे स्थान पर रहीं।

इस प्रतियोगिता में छात्रों ने दिखाया कि गंभीर विषयों को भी नए और रचनात्मक अंदाज़ में लोगों तक पहुंचाया जा सकता है।

वाद-विवाद में तर्कों की रही टक्कर

वाद-विवाद प्रतियोगिता में छात्रों ने पूरे आत्मविश्वास के साथ अपने पक्ष में तर्क रखे। प्रतियोगिता में भास्कर पांडेय और अत्रिदेव पांडेय ने संयुक्त रूप से प्रथम स्थान हासिल किया।

देव विशिष्ट तिवारी और यशी शुक्ला ने दूसरा, सिमरन गुप्ता और सुजीत कुमार द्विवेदी ने तीसरा तथा विदुषी दीक्षित और देवांश तिवारी ने चौथा स्थान प्राप्त किया।

कानून के छात्रों की दलीलों में उनके विषय ज्ञान के साथ अपनी बात को प्रभावी तरीके से रखने की क्षमता भी दिखाई दी।

भाषण प्रतियोगिता में गरिमा पांडेय प्रथम

भाषण प्रतियोगिता में गरिमा पांडेय ने पहला स्थान हासिल किया। अवनीश त्रिपाठी दूसरे, पुनीत यादव तीसरे और यशस्वी सिंह चौथे स्थान पर रहे।

मंच पर छात्रों का आत्मविश्वास और अपनी बात को व्यवस्थित तरीके से रखने का अंदाज़ कार्यक्रम का खास आकर्षण रहा।

तीन छात्रों को विशेष सम्मान

कार्यक्रम में अलग-अलग प्रतियोगिताओं में प्रदर्शन और सक्रिय भागीदारी के आधार पर विशेष पुरस्कार भी दिए गए।

सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए बी.ए. एलएल.बी. (ऑनर्स), पंचम सेमेस्टर के आयुष सिंह को सम्मानित किया गया।

उभरती प्रतिभा के लिए कादंबरी पटेल को विशेष पुरस्कार दिया गया।

वहीं विशिष्ट भागीदारी के लिए दिव्यांशी शाक्य को सम्मानित किया गया।

कानून की पढ़ाई के साथ इंसान और समाज को समझने की कोशिश

‘अभिव्यक्ति’ की खास बात यह रही कि यहां छात्रों को सिर्फ प्रतियोगिता में हिस्सा लेने का अवसर नहीं मिला, बल्कि उन्हें अपनी सोच को शब्द देने का मौका भी मिला।

कानून की पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए यह अनुभव खास महत्व रखता है। एक वकील को सिर्फ कानून की धाराएं याद होना पर्याप्त नहीं होता। उसे सवाल समझना, तर्क करना, अपनी बात साफ तरीके से रखना और सामने वाले को अपनी बात समझाना भी आना चाहिए।

इसी वजह से वाद-विवाद और भाषण जैसी प्रतियोगिताओं के साथ कहानी, निबंध और मीम निर्माण को शामिल करना कार्यक्रम को अलग बनाता है।

निर्णायक मंडल ने परखी छात्रों की प्रतिभा

प्रतियोगिताओं के मूल्यांकन में प्रोफेसर (डॉ.) ए.वी. सिंह, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. आस्था मिश्रा, आयुषी तिवारी, शशि शुक्ला, चारु वर्मा और द्रव्येश नारायण पाठक सहित अन्य शिक्षक निर्णायक मंडल में शामिल रहे।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. श्रुति शर्मा ने किया।

शिक्षकों और विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी से दो दिवसीय कार्यक्रम उत्साहपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ।

‘अभिव्यक्ति’ का मतलब सिर्फ बोलना नहीं, अपनी पहचान बनाना भी है

दो दिन के इस कार्यक्रम के बाद मंच भले ही शांत हो गया, लेकिन छात्रों के भीतर अपनी बात कहने का आत्मविश्वास और बढ़ गया।

किसी ने कलम से अपनी सोच दिखाई, किसी ने मंच पर आवाज़ बुलंद की, किसी ने तर्क से अपनी बात साबित की और किसी ने रचनात्मकता के नए तरीके से सबका ध्यान खींचा।

यही ‘अभिव्यक्ति’ की सबसे बड़ी खासियत रही—यहां छात्रों को सिर्फ पुरस्कार जीतने का मौका नहीं मिला, बल्कि खुद को पहचानने और अपनी प्रतिभा को सामने लाने का अवसर मिला।

श्री रामस्वरूप मेमोरियल विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज़ का यह आयोजन पढ़ाई के साथ छात्रों के व्यक्तित्व विकास, आत्मविश्वास, रचनात्मक सोच और संवाद क्षमता को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बनकर सामने आया।

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