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हिन्दी को न्याय की भाषा बनाने पर जोर, बाराबंकी में विधिक जागरूकता शिविर,हिन्दी दिवस पर टीआरसी लॉ कॉलेज में आयोजन, बोले उज्ज्वल उपाध्याय—आम नागरिक को समझ में आए तभी सार्थक होगा न्याय


रिपोर्ट:सदाचारी लाला उमेश चंद्र श्रीवास्तव /मोहम्मद वसीक 

बाराबंकी। हिन्दी दिवस के अवसर पर टीआरसी लॉ कॉलेज, सतरिख में विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देशानुसार आयोजित कार्यक्रम जनपद न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बाराबंकी श्रीमती प्रतिमा श्रीवास्तव के निर्देशन में तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव श्री उज्ज्वल उपाध्याय की अध्यक्षता में हुआ।

कार्यक्रम में हिन्दी को केवल भाषा नहीं, बल्कि संस्कृति, परंपरा, संवेदना और सामाजिक एकता की मजबूत कड़ी बताते हुए इसे न्याय और विधिक जागरूकता से जोड़ने पर जोर दिया गया।

अपने संबोधन में सचिव उज्ज्वल उपाध्याय ने कहा कि हिन्दी ने देश के अलग-अलग क्षेत्रों और वर्गों के लोगों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आज हिन्दी भारत की सीमाओं से आगे निकलकर दुनिया के अनेक देशों में अपनी पहचान बना रही है।

उन्होंने कहा कि न्याय के क्षेत्र में भाषा का महत्व बेहद महत्वपूर्ण है। न्याय तभी वास्तविक रूप से सार्थक होगा, जब आम नागरिक उसे समझ सके और अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों से परिचित हो। कानूनी प्रावधानों और न्यायिक प्रक्रिया को सरल एवं सहज भाषा में जनता तक पहुंचाना विधिक जागरूकता का अहम हिस्सा है।

उज्ज्वल उपाध्याय ने कहा कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का उद्देश्य समाज के प्रत्येक वर्ग तक न्याय और विधिक सहायता पहुंचाना है। विशेष रूप से गरीब, कमजोर और वंचित लोगों को उनके अधिकारों की जानकारी दिलाना तथा जरूरतमंदों को विधिक सहायता उपलब्ध कराना प्राधिकरण की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि इस उद्देश्य को प्रभावी बनाने में सरल और सहज हिन्दी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

शिविर में विधि छात्रों को विधिक जागरूकता के महत्व से अवगत कराया गया और आम नागरिकों तक कानून एवं उनके अधिकारों की जानकारी सरल भाषा में पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया गया।

कार्यक्रम में टीआरसी लॉ कॉलेज की प्राचार्या डॉ. अश्विनी गुप्ता सहित अध्यापकगण डॉ. नवीन सिंह, डॉ. वीर विक्रम सिंह, डॉ. रत्ना वर्मा और डॉ. अमजद अंसारी तथा विधि छात्र मौजूद रहे।

कार्यक्रम ने हिन्दी दिवस को महज भाषा के उत्सव तक सीमित रखने के बजाय हिन्दी को आम आदमी के अधिकार, कानून और न्याय से जोड़ने का संदेश दिया।

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